Transliteration: (Wa haazaa Kitaabun anzalnaahu Mubaarakum musaddiqul lazee bainaa yadaihi wa litunzira ummal Quraa wa man hawlahaa; wallazeena yu'minoona bil Aakhirati yu'minoona bihee wa hum'alaa Salaatihim yuhaafizoon)
यह आयत कुरआन की आख़िरी और मुकम्मल किताब होने की तस्दीक़ करती है। यह पिछले आसमानी किताबों को सच साबित करने आई है, न कि किसी आने वाली किताब की तैयारी के लिए। इसका मिशन मक्का और उसके आस-पास को चेतावनी देना है। इससे साबित है कि नुबूवत का सिलसिला हुज़ूर ﷺ पर खत्म हो गया।
जो लोग आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं, वे कुरआन पर भी ईमान लाते हैं। उनका ईमान उनके अमल में नज़र आता है—वे नमाज़ की पाबंदी करते हैं। यह सिर्फ़ नमाज़ पढ़ने की नहीं, बल्कि उसे दीन के स्तंभ के तौर पर क़ायम रखने की तारीफ़ है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat