कुरान - 6:92 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

92
وَهَٰذَا كِتَٰبٌ أَنزَلۡنَٰهُ مُبَارَكٞ مُّصَدِّقُ ٱلَّذِي بَيۡنَ يَدَيۡهِ وَلِتُنذِرَ أُمَّ ٱلۡقُرَىٰ وَمَنۡ حَوۡلَهَاۚ وَٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ يُؤۡمِنُونَ بِهِۦۖ وَهُمۡ عَلَىٰ صَلَاتِهِمۡ يُحَافِظُونَ

Transliteration: (Wa haazaa Kitaabun anzalnaahu Mubaarakum musaddiqul lazee bainaa yadaihi wa litunzira ummal Quraa wa man hawlahaa; wallazeena yu'minoona bil Aakhirati yu'minoona bihee wa hum'alaa Salaatihim yuhaafizoon)

और यह एक बरक़तमंद किताब है जिसे हमने नाज़िल किया, जो अपने से पहले को सच साबित करती है, ताकि तुम उम्मुल-क़ुरा (मक्का) और उसके आस-पास वालों को डराओ [192]। और जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं, वे इस पर ईमान रखते हैं, और वे अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं [193] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 92 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 92 की तफ़्सीर

✅ [192] कुरआन के बाद कोई किताब या नबी नहीं आएगा

यह आयत कुरआन की आख़िरी और मुकम्मल किताब होने की तस्दीक़ करती है। यह पिछले आसमानी किताबों को सच साबित करने आई है, न कि किसी आने वाली किताब की तैयारी के लिए। इसका मिशन मक्का और उसके आस-पास को चेतावनी देना है। इससे साबित है कि नुबूवत का सिलसिला हुज़ूर ﷺ पर खत्म हो गया।

✅ [193] सच्चे ईमान वाले नमाज़ क़ायम करते हैं

जो लोग आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं, वे कुरआन पर भी ईमान लाते हैं। उनका ईमान उनके अमल में नज़र आता है—वे नमाज़ की पाबंदी करते हैं। यह सिर्फ़ नमाज़ पढ़ने की नहीं, बल्कि उसे दीन के स्तंभ के तौर पर क़ायम रखने की तारीफ़ है।

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