कुरान - 21:18 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
بَلۡ نَقۡذِفُ بِٱلۡحَقِّ عَلَى ٱلۡبَٰطِلِ فَيَدۡمَغُهُۥ فَإِذَا هُوَ زَاهِقٞۚ وَلَكُمُ ٱلۡوَيۡلُ مِمَّا تَصِفُونَ

Transliteration: (Bal naqzifu bilhaqqi 'alal baatili fa yadmaghuhoo fa izaa huwa zaahiq; wa lakumul wailu mimmaa tasifoon)

18. बल्कि हम हक़ को बातिल पर मारते हैं, तो वह उसका मग़्ज़ (दिमाग़) निकाल देता है और वह उसी वक़्त मिट जाता है [27]; और तुम्हारे लिए तबाही है उन बातों से जो तुम गढ़ते हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 18 की तफ़सीर

"बल्कि हम हक़ को बातिल पर मारते हैं, तो वह उसका मग़्ज़ निकाल देता है और वह उसी वक़्त मिट जाता है [27]; और तुम्हारे लिए तबाही है उन बातों से जो तुम गढ़ते हो।"

[27] हक़ की क़तई फ़तह और बातिल का ज़वाल

बातिल चाहे कितना ही शोर मचाए, हक़ की एक ज़रब उसके दिमाग़ को पाश-पाश कर देती है। जैसे हज़रत मूसा के असा ने सारे जादू को निगल लिया, वैसे ही क़ुरआने मजीद ने कुफ़्र व शिर्क के तमाम बातिल नज़रियात को जड़ से उखाड़ फेंका।

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