कुरान - 21:19 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
وَلَهُۥ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ وَمَنۡ عِندَهُۥ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ عَنۡ عِبَادَتِهِۦ وَلَا يَسۡتَحۡسِرُونَ

Transliteration: (Wa lahoo man fis samaawaati wal ard; wa man 'indahoo laa yastakbiroona 'an 'ibaada tihee wa laa yastahsiroon)

19. और उसी का है जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है; और जो उसके पास हैं [28] वे उसकी इबादत से न तकब्बुर करते हैं [29] और न थकते हैं [30] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 19 की तफ़सीर

"और उसी का है जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है; और जो उसके पास हैं [28] वे उसकी इबादत से न तकब्बुर करते हैं [29] और न थकते हैं [30] ।"

[28] कायनात की मिल्कियत

ज़मीन व आसमान की हर चीज़ अल्लाह की मलूक और बंदा है, कोई उसका शरीक नहीं हो सकता।

[29] मुक़र्रब फ़रिश्तों की आजिज़ाना बंदगी

मुक़र्रब फ़रिश्ते अपनी अज़ीम ताक़त के बावजूद अल्लाह की इबादत में आजिज़ी से झुकते हैं और कभी तकब्बुर नहीं करते।

[30] बे-थकान इबादत और महबूबाने ख़ुदा की ताक़त

अल्लाह तआला अपने महबूब बंदों को ऐसी रूहानी क़ुव्वत अता फ़रमाता है कि वे थकते नहीं। हमारे हुज़ूर (ﷺ) ने लगातार कई दिन के रोज़े (सौमे विसाल) रखे, और बुज़ुर्गाने दीन ने मुद्दतों अल्लाह की इबादत में ऐसी बेमिसाल ताक़त का मुज़ाहिरा किया।

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