कुरान - 21:20 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
يُسَبِّحُونَ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَ لَا يَفۡتُرُونَ

Transliteration: (Yusabbihoona laila wannahaara laa yafturoon)

20. वे रात-दिन उसकी पाकी बयान करते हैं और ज़रा सुस्ती नहीं करते [31] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 20 की तफ़सीर

"वे रात-दिन उसकी पाकी बयान करते हैं और ज़रा सुस्ती नहीं करते [31] ।"

[31] फ़रिश्तों की दायमी तस्बीह

फ़रिश्तों के लिए तस्बीह और ज़िक्र-ए-इलाही वैसा ही फ़ितरी और मुसलसल है जैसे इंसानों के लिए सांस लेना। वे हर लम्हा हम्दो-सना और तस्बीह में मशग़ूल रहते हैं।

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