कुरान - 21:22 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
لَوۡ كَانَ فِيهِمَآ ءَالِهَةٌ إِلَّا ٱللَّهُ لَفَسَدَتَاۚ فَسُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ رَبِّ ٱلۡعَرۡشِ عَمَّا يَصِفُونَ

Transliteration: (Law kaana feehimaaa aalihatun illal laahu lafasadataa; fa-Subhaanal laahi Rabbil 'Arshi 'ammaa yasifoon)

22. अगर इन दोनों (आसमान व ज़मीन) में अल्लाह के सिवा दूसरे माबूद भी होते, तो ये दोनों यक़ीनन बर्बाद (दरहम-बरहम) हो जाते [32]; पस पाक है अल्लाह, जो अर्श का रब है, उन बातों से जो ये लोग बयान करते हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 22 की तफ़सीर

"अगर इन दोनों (आसमान व ज़मीन) में अल्लाह के सिवा दूसरे माबूद भी होते, तो ये दोनों यक़ीनन बर्बाद (दरहम-बरहम) हो जाते [32]; पस पाक है अल्लाह, जो अर्श का रब है, उन बातों से जो ये लोग बयान करते हैं!"

[32] तौहीद की क़तई अक़ली दलील (बुरहाने तमानुअ)

यह आयत तौहीद (अल्लाह की वहदानियत) की एक अज़ीम और निहायत मज़बूत अक़ली दलील पेश करती है जिसे इल्मे कलाम में 'बुरहाने तमानुअ' कहा जाता है:

  • अगर कायनात में एक से ज़ियादा ख़ुदा होते, तो उनके इरादे और अहकाम में टकराव लाज़िमी था। एक कुछ चाहता और दूसरा कुछ और, जिसका नतीजा यह होता कि पूरा निज़ामे कायनात दरहम-बरहम होकर तबाह हो जाता।

  • यदि दोनों हर बात में मुत्तफ़िक़ रहते, तो दोनों का मुस्तक़िल ख़ुदा होना बातिल हो जाता क्योंकि एक ही निज़ाम के लिए दो आज़ाद मुतलक़ इख़्तियारात का जमा होना मुहाल (असंभव) है।

लिहाज़ा ज़मीन व आसमान का यह बे-ऐब, मुनज़्ज़म और मुतवाज़िन निज़ाम इस बात का खुला सुबूत है कि इसका ख़ालिक़ और मुदब्बिर सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही ज़ात — अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त है।

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