कुरान - 21:51 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
۞وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَآ إِبۡرَٰهِيمَ رُشۡدَهُۥ مِن قَبۡلُ وَكُنَّا بِهِۦ عَٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa laqad aatainaaa Ibraaheema rushdahoo min qablu wa kunnaa bihee 'aalimeen)

51. और यक़ीनन हमने इससे पहले इब्राहीम को उनकी समझ-बूझ (रुश्द व हिदायत) अता की थी [81], और हम उनके (नेक हाल) से ख़ूब वाक़िफ़ थे [82] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 51 की तफ़सीर

"और यक़ीनन हमने इससे पहले इब्राहीम को उनकी समझ-बूझ (रुश्द व हिदायत) अता की थी [81], और हम उनके (नेक हाल) से ख़ूब वाक़िफ़ थे [82] ।"

[81] हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का फ़ितरी रुश्द व हिदायत

अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को बचपन ही से कामिल समझ-बूझ, अक़्ल और रुश्द अता फ़रमाया था। उन्होंने कभी किसी बुत या सितारे की पूजा नहीं की, बल्कि हमेशा तौहीद पर क़ाइम रहे।

[82] इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की पाकीज़गी का इल्मे इलाही

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम उनके इख़्लास, सिद्क़ और अहलियत से अज़ल से बा-ख़बर थे। इससे उन लोगों का रद्द होता है जो अंबिया की शान में गुस्ताख़ी करते हुए यह गुमान करते हैं कि वे नुबुव्वत से पहले (मआज़ल्लाह) शिर्क या गुनाह में मुब्तला थे। तमाम अंबिया मादरज़ाद मासूम और मुवह्हिद होते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now