Transliteration: (Allazeena yakhshawna Rabbahum bilghaibi wa hum minas Saa'ati mushfiqoon)
"जो लोग अपने रब से बे-देखे डरते हैं [79] और वे क़ियामत की घड़ी से थर-थर कांपते रहते हैं।"
सच्चे मोमिनों की सबसे बड़ी अलामत यह है कि वे तन्हाई में भी जब कोई देखने वाला नहीं होता, अल्लाह से डरते हैं। यह ख़ौफ़ किसी दुनियावी ख़तरे की बिना पर नहीं, बल्कि ईमान बिल-ग़ैब और अल्लाह की अज़्मत की पहचान से पैदा होता है। साथ ही वे क़ियामत की पेशी और मुहासिबे से हर लम्हा लरज़ाँ रहते हैं।
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