कुरान - 21:48 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ ٱلۡفُرۡقَانَ وَضِيَآءٗ وَذِكۡرٗا لِّلۡمُتَّقِينَ

Transliteration: (Wa laqad aatainaa Moosa wa haaroonal Furqaana wa diyaa'anw wa zikral lilmuttaqeen)

48. और यक़ीनन हमने मूसा और हारून को 'फ़ुरक़ान' (हक़ व बातिल का फ़ैसला करने वाली किताब) [78] और रोशनी और परहेज़गारों के लिए नसीहत अता की; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 48 की तफ़सीर

"और यक़ीनन हमने मूसा और हारून को 'फ़ुरक़ान' (हक़ व बातिल का फ़ैसला करने वाली किताब) [78] और रोशनी और परहेज़गारों के लिए नसीहत अता की;"

[78] तौरैत शरीफ़: फ़ुरक़ान, नूर और मौइज़ाह

यहाँ हज़रत मूसा और हज़रत हारून (अलैहिमुस्सलाम) को दी गई किताब तौरैत की तीन अज़ीम सिफ़ात बयान फ़रमाई गई हैं:

  • फ़ुरक़ान: हक़ और बातिल, हलाल और हराम में वाज़ेह फ़र्क़ करने वाली।

  • ज़िया (रोशनी): दिलों और अक़्लों को जहालत की तारीकियों से निकालकर हिदायत के नूर से मुनव्वर करने वाली।

  • ज़िक्र (नसीहत): मुत्तक़ीन और ख़ुदा-तर्स बंदों के लिए इबरत व नसीहत का ख़ज़ीना।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now