Transliteration: (Wa haazaa Zikrum Mubaarakun anzalnaah; afa antum lahoo munkiroon (section 4))
"और यह (क़ुरआन) एक बा-बरकत ज़िक्र (नसीहत) है जिसे हमने नाज़िल किया है [80]; तो क्या फिर भी तुम इसका इनकार करते हो?"
अल्लाह तआला ने क़ुरआने मजीद को 'ज़िक्रुन मुबारक' (बा-बरकत नसीहत) फ़रमाया:
इसकी तिलावत में बरकत, इस पर अमल करने में बरकत, और इससे हासिल होने वाली हिदायत दुनिया व आख़िरत की कामरानियों की ज़ामिन है।
इतनी बा-बरकत और रोशन किताब के नाज़िल होने के बाद भी इसका इनकार करना सरासर बद-बख़्ती और ना-इंसाफ़ी है।
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