कुरान - 21:50 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
وَهَٰذَا ذِكۡرٞ مُّبَارَكٌ أَنزَلۡنَٰهُۚ أَفَأَنتُمۡ لَهُۥ مُنكِرُونَ

Transliteration: (Wa haazaa Zikrum Mubaarakun anzalnaah; afa antum lahoo munkiroon (section 4))

50. और यह (क़ुरआन) एक बा-बरकत ज़िक्र (नसीहत) है जिसे हमने नाज़िल किया है [80]; तो क्या फिर भी तुम इसका इनकार करते हो? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 50 की तफ़सीर

"और यह (क़ुरआन) एक बा-बरकत ज़िक्र (नसीहत) है जिसे हमने नाज़िल किया है [80]; तो क्या फिर भी तुम इसका इनकार करते हो?"

[80] क़ुरआने करीम की बरकत और अज़्मत

अल्लाह तआला ने क़ुरआने मजीद को 'ज़िक्रुन मुबारक' (बा-बरकत नसीहत) फ़रमाया:

  • इसकी तिलावत में बरकत, इस पर अमल करने में बरकत, और इससे हासिल होने वाली हिदायत दुनिया व आख़िरत की कामरानियों की ज़ामिन है।

  • इतनी बा-बरकत और रोशन किताब के नाज़िल होने के बाद भी इसका इनकार करना सरासर बद-बख़्ती और ना-इंसाफ़ी है।

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