कुरान - 21:46 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
وَلَئِن مَّسَّتۡهُمۡ نَفۡحَةٞ مِّنۡ عَذَابِ رَبِّكَ لَيَقُولُنَّ يَٰوَيۡلَنَآ إِنَّا كُنَّا ظَٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa la'in massat hum nafhatun min 'azaabi Rabbika la yaqoolunna yaawailanaaa innnaa kunnaa zaalimeen)

46. और अगर आपके रब के अज़ाब का एक मामूली सा झोंका भी उन्हें छू जाए, तो वे ज़रूर पुकार उठेंगे कि 'हाय हमारी बर्बादी [74]! बेशक हम ही ज़ालिम थे।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 46 की तफ़सीर

"और अगर आपके रब के अज़ाब का एक मामूली सा झोंका भी उन्हें छू जाए, तो वे ज़रूर पुकार उठेंगे कि 'हाय हमारी बर्बादी [74]! बेशक हम ही ज़ालिम थे।'"

[74] अज़ाब की मामूली झलक और काफ़िरों का इक़रार-ए-जुर्म

जो काफ़िर अपनी सरकशी में अज़ाब को जल्दी लाने का मज़ाक़ उड़ाते हैं, उनका हाल यह है कि अगर अल्लाह के अज़ाब का एक हल्का सा झोंका (नफ़्हा) भी उन्हें छू ले, तो उनकी सारी अकड़ ख़ाक में मिल जाएगी। वे बे-इख़्तियार चीख़ उठेंगे कि हाय हमारी हलाकत, बेशक हम ही अपने नफ़्सों पर ज़ुल्म करने वाले थे। लेकिन उस वक़्त का इक़रार और पछतावा कोई नफ़ा न देगा।

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