कुरान - 21:45 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
قُلۡ إِنَّمَآ أُنذِرُكُم بِٱلۡوَحۡيِۚ وَلَا يَسۡمَعُ ٱلصُّمُّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا مَا يُنذَرُونَ

Transliteration: (Qul innamaaa unzirukum bilwahyi; wa laa yasma'us summud du'aaa 'a izaa maa yunzaroon)

45. कह दीजिए कि 'मैं तो बस तुम्हें वह्य के ज़रिये डराता हूँ [72];' और बहरे पुकार को नहीं सुनते जब उन्हें डराया जाता है [73] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 45 की तफ़सीर

"कह दीजिए कि 'मैं तो बस तुम्हें वह्य के ज़रिये डराता हूँ [72];' और बहरे पुकार को नहीं सुनते जब उन्हें डराया जाता है [73] ।"

[72] वह्य-ए-इलाही की बुहतानी और यक़ीनी बुनियाद

हुज़ूर नबी-ए-करीम (ﷺ) का यह फ़रमान कि मैं सिर्फ़ वह्य के ज़रिये तुम्हें आगाह करता हूँ, यह वाज़ेह करता है कि आप अपनी तरफ़ से कोई क़यास या अन्दाज़ा बयान नहीं करते, बल्कि जो कुछ फ़रमाते हैं वह अल्लाह की भेजी हुई क़तई और बे-ऐब वह्य होती है।

[73] रूहानी बहरापन

काफ़िर ज़ाहिरी तौर पर तो कान रखते थे और अल्फ़ाज़ सुनते थे, मगर चूंकि वे हक़ को क़बूल करने और नसीहत हासिल करने की नीयत से महरूम थे, इसलिए क़ुरआने करीम ने उन्हें 'बहरा' क़रार दिया। जो हक़ न सुने और न माने, वह रूहानी एतबार से बहरा और मुर्दा है।

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