कुरान - 21:43 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
أَمۡ لَهُمۡ ءَالِهَةٞ تَمۡنَعُهُم مِّن دُونِنَاۚ لَا يَسۡتَطِيعُونَ نَصۡرَ أَنفُسِهِمۡ وَلَا هُم مِّنَّا يُصۡحَبُونَ

Transliteration: (Am lahum aalihatun tamna'uhum min dooninaa; laa yastatee'oona nasra anfusihim wa laa hum minna yus-haboon)

43. क्या उनके पास हमारे सिवा ऐसे माबूद हैं जो उन्हें बचा सकें? वे तो खुद अपनी मदद भी नहीं कर सकते [68], और न हमारी तरफ़ से उनका कोई साथ दिया जाएगा [69] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 43 की तफ़सीर

"क्या उनके पास हमारे सिवा ऐसे माबूद हैं जो उन्हें बचा सकें? वे तो खुद अपनी मदद भी नहीं कर सकते [68], और न हमारी तरफ़ से उनका कोई साथ दिया जाएगा [69] ।"

[68] बातिल माबूदों की बेबसी

मुशरिक जिन मूर्तियों और माबूदों को पूजते हैं, उनकी हक़ीक़त यह है कि वे खुद अपनी हिफ़ाज़त करने की भी ताक़त नहीं रखते। अगर कोई मक्खी भी उनसे कुछ छीन ले या कोई उन्हें तोड़ दे तो वे अपना दिफ़ाअ नहीं कर सकते। जो खुद बेबस हैं, वे दूसरों को ख़ुदा के अज़ाब से कैसे बचा सकते हैं?

[69] मुशरिकों का कोई मददगार नहीं

क़ियामत के दिन उन काफ़िरों और मुशरिकों का कोई मददगार और हामी नहीं होगा। अल्लाह के मुक़ाबले में न उनके बुत काम आएंगे और न कोई दुनियावी ताक़त उन्हें बचा सकेगी।

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