कुरान - 21:42 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
قُلۡ مَن يَكۡلَؤُكُم بِٱلَّيۡلِ وَٱلنَّهَارِ مِنَ ٱلرَّحۡمَٰنِۚ بَلۡ هُمۡ عَن ذِكۡرِ رَبِّهِم مُّعۡرِضُونَ

Transliteration: (Qul mai yakla 'ukum billaili wannahaari minar Rahmaan; bal hum 'an zikri Rabbihim mu'ridoon)

42. कह दीजिए कि 'रात और दिन में रहमान (के अज़ाब) से तुम्हारी हिफ़ाज़त कौन कर सकता है [66]?' बल्कि वे तो अपने रब की याद से मुंह मोड़े हुए हैं [67] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 42 की तफ़सीर

"कह दीजिए कि 'रात और दिन में रहमान (के अज़ाब) से तुम्हारी हिफ़ाज़त कौन कर सकता है [66]?' बल्कि वे तो अपने रब की याद से मुंह मोड़े हुए हैं [67] ।"

[66] हक़ीक़ी मुहाफ़िज़ सिर्फ़ अल्लाह तआला है

इंसान रात को नींद में हो या दिन में अपने कामों में मशग़ूल, हर लम्हा हादसात और आफ़ात के ख़तरात में घिरा रहता है। अल्लाह तआला के सिवा कोई ज़ात ऐसी नहीं जो रात और दिन में बंदे की मुहाफ़िज़ बन सके। अगर रहमान का अज़ाब आ पहुंचे, तो कोई ताक़त उसे टाल नहीं सकती।

[67] ज़िक्रे इलाही से रू-गर् Dani

इस नेअमत और हिफ़ाज़त के बावजूद काफ़िरों का हाल यह है कि वे अपने रब की याद, उसकी किताब और उसकी इबादत से मुंह मोड़े हुए हैं। जो ज़ात उन्हें हर लम्हा ज़िन्दगी और हिफ़ाज़त बख़्शती है, उसी के ज़िक्र से ग़फ़लत बरतना खुली ना-शुक्री है।

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