कुरान - 21:47 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
وَنَضَعُ ٱلۡمَوَٰزِينَ ٱلۡقِسۡطَ لِيَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِ فَلَا تُظۡلَمُ نَفۡسٞ شَيۡـٔٗاۖ وَإِن كَانَ مِثۡقَالَ حَبَّةٖ مِّنۡ خَرۡدَلٍ أَتَيۡنَا بِهَاۗ وَكَفَىٰ بِنَا حَٰسِبِينَ

Transliteration: (Wa nada'ul mawaazeenal qista li Yawmil Qiyaamati falaa tuzlamu nafsun shai'aa; wa in kaana misqaala habbatim min khardalin atainaa bihaa; wa kafaa binaa haasibeen)

47. और हम क़ियामत के दिन इंसाफ़ के तराज़ू (मीज़ान) क़ायम करेंगे [75], तो किसी जान पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएगा [76]; और अगर (किसी का अमल) राई के दाने के बराबर भी होगा, तो हम उसे ला हाज़िर करेंगे; और हम हिसाब लेने के लिए काफ़ी हैं [77] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 47 की तफ़सीर

"और हम क़ियामत के दिन इंसाफ़ के तराज़ू (मीज़ान) क़ायम करेंगे [75], तो किसी जान पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएगा [76]; और अगर (किसी का अमल) राई के दाने के बराबर भी होगा, तो हम उसे ला हाज़िर करेंगे; और हम हिसाब लेने के लिए काफ़ी हैं [77] ।"

[75] मीज़ान-ए-अदल का क़याम

क़ियामत के दिन अल्लाह तआला मीज़ान (तराज़ू) नसब फ़रमाएगा। यह एक हक़ीक़ी तराज़ू होगा जिसके दो पलड़े और एक डंडी होगी। इसमें बंदों के आमाल की कसरत और वज़न को तौला जाएगा। नेकियों का पलड़ा भारी होना निजात की अलामत होगा।

[76] मुतलक़ अदल व इंसाफ़

उस दिन किसी इंसान पर ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं होगा: न किसी नेक की नेकी घटाई जाएगी और न किसी बे-गुनाह के सर कोई गुनाह थोपा जाएगा। हर एक को उसके आमाल का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।

[77] बारीक तरीन आमाल का मुहासिबा

अगर किसी का अमल राई के दाने जैसा बारीक और हक़ीर भी होगा, तो अल्लाह तआला उसे भी मीज़ान में हाज़िर कर देगा। अल्लाह तआला तमाम मख़लूक़ात का हिसाब एक ही लम्हे में लेने पर क़ादिर है और उसे किसी मुहासिब या मुआवीन की हाजत नहीं।

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