Transliteration: (Wa nada'ul mawaazeenal qista li Yawmil Qiyaamati falaa tuzlamu nafsun shai'aa; wa in kaana misqaala habbatim min khardalin atainaa bihaa; wa kafaa binaa haasibeen)
"और हम क़ियामत के दिन इंसाफ़ के तराज़ू (मीज़ान) क़ायम करेंगे [75], तो किसी जान पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएगा [76]; और अगर (किसी का अमल) राई के दाने के बराबर भी होगा, तो हम उसे ला हाज़िर करेंगे; और हम हिसाब लेने के लिए काफ़ी हैं [77] ।"
क़ियामत के दिन अल्लाह तआला मीज़ान (तराज़ू) नसब फ़रमाएगा। यह एक हक़ीक़ी तराज़ू होगा जिसके दो पलड़े और एक डंडी होगी। इसमें बंदों के आमाल की कसरत और वज़न को तौला जाएगा। नेकियों का पलड़ा भारी होना निजात की अलामत होगा।
उस दिन किसी इंसान पर ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं होगा: न किसी नेक की नेकी घटाई जाएगी और न किसी बे-गुनाह के सर कोई गुनाह थोपा जाएगा। हर एक को उसके आमाल का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।
अगर किसी का अमल राई के दाने जैसा बारीक और हक़ीर भी होगा, तो अल्लाह तआला उसे भी मीज़ान में हाज़िर कर देगा। अल्लाह तआला तमाम मख़लूक़ात का हिसाब एक ही लम्हे में लेने पर क़ादिर है और उसे किसी मुहासिब या मुआवीन की हाजत नहीं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat