Transliteration: (Qaalooo aji'tanaa bil haqqi am anta minal laa'ibeen)
"वे बोले, 'क्या तुम हमारे पास कोई सच्ची बात लाए हो या तुम महज़ मज़ाक़ करने वालों में से हो [86]?'"
मुशरिक़ीन बुतपरस्ती में इस क़दर डूबे हुए थे कि उन्हें बुतों के बातिल होने का तसव्वुर ही एक मज़ाक़ मालूम होता था। उन्होंने हज़रत इब्राहीम से हैरत से पूछा कि क्या तुम संजीदगी से यह बात कह रहे हो या महज़ दिल्लगी कर रहे हो?
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