Transliteration: (Wa tallaahi la akeedanna asnaamakum ba'da an tuwalloo mudbireen)
"'और अल्लाह की क़सम! जब तुम अपनी पीठ फेर कर चले जाओगे, तो मैं तुम्हारे इन बुतों के साथ ज़रूर एक चाल चलूँगा [89] ।'"
हज़रत इब्राहीम ने क़सम खाकर अपनी क़ौम के बुतों को तोड़ने और उनकी बेबसी को अवाम पर आशिकारा करने का अज़्म फ़रमाया। उन्होंने अपनी हिकमत से ऐसा वक़्त चुना जब तमाम लोग शहर से बाहर अपने सालाना मेले में चले जाएं ताकि वे ख़लवत में इन पत्थरों की बे-हक़ीक़ती को बे-नक़ाब कर सकें।
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