कुरान - 21:57 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
وَتَٱللَّهِ لَأَكِيدَنَّ أَصۡنَٰمَكُم بَعۡدَ أَن تُوَلُّواْ مُدۡبِرِينَ

Transliteration: (Wa tallaahi la akeedanna asnaamakum ba'da an tuwalloo mudbireen)

57. 'और अल्लाह की क़सम! जब तुम अपनी पीठ फेर कर चले जाओगे, तो मैं तुम्हारे इन बुतों के साथ ज़रूर एक चाल चलूँगा [89] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 57 की तफ़सीर

"'और अल्लाह की क़सम! जब तुम अपनी पीठ फेर कर चले जाओगे, तो मैं तुम्हारे इन बुतों के साथ ज़रूर एक चाल चलूँगा [89] ।'"

[89] हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का अज़्म और हिकमत

हज़रत इब्राहीम ने क़सम खाकर अपनी क़ौम के बुतों को तोड़ने और उनकी बेबसी को अवाम पर आशिकारा करने का अज़्म फ़रमाया। उन्होंने अपनी हिकमत से ऐसा वक़्त चुना जब तमाम लोग शहर से बाहर अपने सालाना मेले में चले जाएं ताकि वे ख़लवत में इन पत्थरों की बे-हक़ीक़ती को बे-नक़ाब कर सकें।

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