कुरान - 21:58 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
فَجَعَلَهُمۡ جُذَٰذًا إِلَّا كَبِيرٗا لَّهُمۡ لَعَلَّهُمۡ إِلَيۡهِ يَرۡجِعُونَ

Transliteration: (Faja'alahum juzaazan illaa kabeeral lahum la'allahum ilaihi yarji'oon)

58. पस उन्होंने उन सबको टुकड़े-टुकड़े कर डाला [90] सिवाय उनके एक बड़े (बुत) के, ताकि वे उसकी तरफ़ रुजू करें (और उससे पूछें) [91] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 58 की तफ़सीर

"पस उन्होंने उन सबको टुकड़े-टुकड़े कर डाला [90] सिवाय उनके एक बड़े (बुत) के, ताकि वे उसकी तरफ़ रुजू करें (और उससे पूछें) [91] ।"

[90] बुतों की शिकस्त व रेज़ा-रेज़ा होना

जब क़ौम मेले में चली गई, तो हज़रत इब्राहीम बुतख़ाने में तशरीफ़ ले गए और कुल्हाड़े से तमाम बुतों को तोड़कर रेज़ा-रेज़ा कर दिया।

[91] बड़े बुत को बाक़ी रखने की हिकमत

उन्होंने सबसे बड़े बुत को छोड़ दिया और कुल्हाड़ा उसके कंधे पर रख दिया। इसकी हिकमत यह थी कि जब मुशरिक लौटकर आएं, तो वे अपनी आंखों से देखें कि अगर यह बड़ा बुत बाक़ी बुतों की हिफ़ाज़त नहीं कर सका और खुद अपने टूटे हुए साथियों का बदला नहीं ले सका, तो फिर यह ख़ुदा कैसे हो सकता है? ताकि वे अक़्ल से काम लें।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now