Transliteration: (Faja'alahum juzaazan illaa kabeeral lahum la'allahum ilaihi yarji'oon)
"पस उन्होंने उन सबको टुकड़े-टुकड़े कर डाला [90] सिवाय उनके एक बड़े (बुत) के, ताकि वे उसकी तरफ़ रुजू करें (और उससे पूछें) [91] ।"
जब क़ौम मेले में चली गई, तो हज़रत इब्राहीम बुतख़ाने में तशरीफ़ ले गए और कुल्हाड़े से तमाम बुतों को तोड़कर रेज़ा-रेज़ा कर दिया।
उन्होंने सबसे बड़े बुत को छोड़ दिया और कुल्हाड़ा उसके कंधे पर रख दिया। इसकी हिकमत यह थी कि जब मुशरिक लौटकर आएं, तो वे अपनी आंखों से देखें कि अगर यह बड़ा बुत बाक़ी बुतों की हिफ़ाज़त नहीं कर सका और खुद अपने टूटे हुए साथियों का बदला नहीं ले सका, तो फिर यह ख़ुदा कैसे हो सकता है? ताकि वे अक़्ल से काम लें।
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