Transliteration: (Qaala laqad kuntum antum wa aabaaa'ukum fee dalaalin mubeen)
"इब्राहीम ने कहा, 'यक़ीनन तुम और तुम्हारे बाप-दादा सब के सब खुली गुमराही में पड़े रहे [85] ।'"
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने बे-ख़ौफ़ होकर हक़ का ऐलान फ़रमाया कि अगर तुम्हारे बाप-दादा भी बे-जान पत्थरों को पूजते थे, तो वे भी गुमराह थे और तुम भी उसी सरीह गुमराही में मुब्तला हो। इससे मालूम हुआ कि दीन के मामले में कलिमा-ए-हक़ कहने में किसी की मुफ़ात या रिश्तेदारी का लिहाज़ नहीं किया जाता।
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