कुरान - 21:54 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
قَالَ لَقَدۡ كُنتُمۡ أَنتُمۡ وَءَابَآؤُكُمۡ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (Qaala laqad kuntum antum wa aabaaa'ukum fee dalaalin mubeen)

54. इब्राहीम ने कहा, 'यक़ीनन तुम और तुम्हारे बाप-दादा सब के सब खुली गुमराही में पड़े रहे [85] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 54 की तफ़सीर

"इब्राहीम ने कहा, 'यक़ीनन तुम और तुम्हारे बाप-दादा सब के सब खुली गुमराही में पड़े रहे [85] ।'"

[85] हक़ के इज़हार में बे-बाकी और अंधी तक़लीद का बुतलान

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने बे-ख़ौफ़ होकर हक़ का ऐलान फ़रमाया कि अगर तुम्हारे बाप-दादा भी बे-जान पत्थरों को पूजते थे, तो वे भी गुमराह थे और तुम भी उसी सरीह गुमराही में मुब्तला हो। इससे मालूम हुआ कि दीन के मामले में कलिमा-ए-हक़ कहने में किसी की मुफ़ात या रिश्तेदारी का लिहाज़ नहीं किया जाता।

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