कुरान - 21:63 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
قَالَ بَلۡ فَعَلَهُۥ كَبِيرُهُمۡ هَٰذَا فَسۡـَٔلُوهُمۡ إِن كَانُواْ يَنطِقُونَ

Transliteration: (Qaala bal fa'alahoo kabeeruhum haazaa fas'aloohum in kaanoo yantiqoon)

63. इब्राहीम ने कहा, 'नहीं, बल्कि उनके इस बड़े (बुत) ने यह काम किया होगा [94]; पस इन्हीं से पूछ लो अगर ये बोलते हों!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 63 की तफ़सीर

"इब्राहीम ने कहा, 'नहीं, बल्कि उनके इस बड़े (बुत) ने यह काम किया होगा [94]; पस इन्हीं से पूछ लो अगर ये बोलते हों!'"

[94] हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का ज़बरदस्त इल्ज़ामी जवाब

हज़रत इब्राहीम का यह फ़रमाना कि "इनके इस बड़े ने किया होगा, इन्हीं से पूछ लो अगर ये बोलते हों" — झूठ नहीं था बल्कि मुशरिकों को ला-जवाब करने के लिए एक हकीमाना और तंज़िया (sarcastic) कलाम था:

  • मक़सद यह साबित करना था कि जब तुम्हारा यह बड़ा माबूद न बोल सकता है और न कुछ कर सकता है, तो तुम ऐसे बे-बस पत्थरों को पूजते क्यों हो?

  • हज़रत इब्राहीम ने उनके अक़ीदे के बुतलान को उन्हीं की ज़बान से क़बूल कराने के लिए यह अंदाज़ इख़्तियार फ़रमाया।

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