कुरान - 21:64 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
فَرَجَعُوٓاْ إِلَىٰٓ أَنفُسِهِمۡ فَقَالُوٓاْ إِنَّكُمۡ أَنتُمُ ٱلظَّـٰلِمُونَ

Transliteration: (Faraja'ooo ilaaa anfusihim faqaalooo innakum antumuz zaalimoon)

64. तो वे अपने दिलों की तरफ़ लौटे और (आपस में) कहने लगे, 'यक़ीनन तुम खुद ही ज़ालिम (और बेवकूफ़) हो [95] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 64 की तफ़सीर

"तो वे अपने दिलों की तरफ़ लौटे और (आपस में) कहने लगे, 'यक़ीनन तुम खुद ही ज़ालिम (और बेवकूफ़) हो [95] ।'"

[95] मुशरिकों का अपनी ज़ात पर शर्मिंदगी का इज़हार

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के इस हकीमाना जवाब ने उनके ज़मीरों को झंझोड़ कर रख दिया। वे शर्मिंदा होकर आपस में कहने लगे कि वाक़ई हम ही ज़ालिम और बेवक़ूफ़ हैं जो ऐसे लाचार बुतों की पूजा करते हैं जो बोल भी नहीं सकते। हक़ उनके सामने बे-नक़ाब हो गया।

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