कुरान - 21:65 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
ثُمَّ نُكِسُواْ عَلَىٰ رُءُوسِهِمۡ لَقَدۡ عَلِمۡتَ مَا هَـٰٓؤُلَآءِ يَنطِقُونَ

Transliteration: (Summa nukisoo 'alaa ru'oosihim laqad 'alimta maa haaa'ulaaa'i yantiqoon)

65. फिर वे अपने सरों के बल औंधे कर दिए गए [96] (यानी अपनी पुरानी हठधर्मी पर लौट आए और बोले), 'तू तो अच्छी तरह जानता है कि ये बोलते नहीं हैं!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 65 की तफ़सीर

"फिर वे अपने सरों के बल औंधे कर दिए गए [96] (यानी अपनी पुरानी हठधर्मी पर लौट आए और बोले), 'तू तो अच्छी तरह जानता है कि ये बोलते नहीं हैं!'"

[96] हठधर्मी और अक़्ल का दिवालियापन

हक़ ज़ाहिर होने के बावजूद उनकी पुरानी सरकशी और शैतानी ग़ुरूर ने उन्हें दोबारा घेर लिया। वे अपने सरों के बल औंधे हो गए यानी शर्मिंदगी के बावजूद हठधर्मी पर उतर आए और कहने लगे कि ऐ इब्राहीम, तू तो जानता ही है कि ये बुत बोलते नहीं हैं! यानी उन्होंने खुद अपने मुंह से अपने माबूदों की बेबसी का एतिराफ़ कर लिया।

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