Transliteration: (Uffil lakum wa limaa ta'budoona min doonil laah; afalaa ta'qiloon)
"'तुफ़ (लानत व अफ़सोस) है तुम पर और उन पर जिनकी तुम अल्लाह के सिवा पूजा करते हो! तो क्या तुम बिल्कुल अक़्ल से काम नहीं लेते [98]?'"
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने सख्त अल्फ़ाज़ में मुशरिकों और उनके बातिल माबूदों पर तन्क़ीद फ़रमाई। इससे मालूम हुआ कि दीने हक़ की हिफ़ाज़त और कुफ़्र व शिर्क के बुतलान के लिए मुशरिक़ीन के झूठे अक़ीदों पर सख़्ती से निकार करना अंबिया-ए-किराम की सुन्नत है। हज़रत इब्राहीम ने पूरी क़ौम और बादशाह के मुक़ाबले में अकेले खड़े होकर यह कलिमा-ए-हक़ बुलन्द फ़रमाया।
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