Transliteration: (Qaaloo harriqoohu wansurooo aalihatakum in kuntum faa'ileen)
"वे (चीख़ कर) बोले, 'इसे जला डालो और अपने माबूदों की मदद करो, अगर तुम्हें कुछ करना ही है [99]!'"
जब मुशरिक़ीन दलाइल के मैदान में पूरी तरह ला-जवाब और ज़लील हो गए, तो उन्होंने ज़ुल्म और ताक़त का सहारा लिया। नमरूद और उसके सरदारों ने फ़ैसला किया कि इब्राहीम को ज़िन्दा जला दिया जाए ताकि माबूदों का इंतिक़ाम लिया जा सके।
चुनांचे एक महीने तक लकड़ी जमा करके एक बहुत बड़ा अलाव सुलगाया गया जिसकी आग की लपटें आसमान से बातें कर रही थीं। जब हज़रत इब्राहीम को मिन्जनीक़ (गुलेल जैसी मशीन) में रखकर आग में फेंका जाने लगा, तो हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) हाज़िर हुए और अर्ज़ किया: 'क्या आपको कोई हाजत है?' हज़रत इब्राहीम ने फ़रमाया: 'तुमसे कोई हाजत नहीं; मेरा रब मेरे हाल से ख़ूब वाक़िफ़ है।' यह तवक्कुल की मेअराज थी।
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