Transliteration: (Qulnaa yaa naaru koonee bardanw wa salaaman 'alaaa Ibraaheem)
"हमने फ़रमाया, 'ऐ आग! तू इब्राहीम पर ठंडी और सलामती वाली बन जा [100]!'"
अल्लाह तआला ने आग को हुक्म दिया: 'बर्दन व सलामा' (ठंडी और सलामती वाली बन जा)। मुफ़स्सिरीन फ़रमाते हैं कि अगर अल्लाह सिर्फ़ 'ठंडी हो जा' फ़रमाता, तो आग की ठंडक और ज़महरीर से तकलीफ़ पहुंच सकती थी, मगर लफ़्ज़े 'सलाम' के इज़ाफ़े ने उस भड़कती हुई आग को हज़रत इब्राहीम के लिए एक निहायत ख़ुशगवार, महफ़ूज़ और मोअतदिल बाग़ीचे (गुलज़ार) में तब्दील कर दिया। आग ने हज़रत इब्राहीम के जिस्म या लिबास को छुआ तक नहीं, सिर्फ़ वे रस्सियाँ जलाईं जिनसे उन्हें बांधा गया था।
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