कुरान - 21:70 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
وَأَرَادُواْ بِهِۦ كَيۡدٗا فَجَعَلۡنَٰهُمُ ٱلۡأَخۡسَرِينَ

Transliteration: (Wa araadoo bihee kaidan faja'alnaahumul akhsareen)

70. और उन्होंने उनके साथ एक बुरी चाल चलनी चाही थी, मगर हमने उन्हीं को सबसे ज़्यादा नुक़्सान उठाने वाला (नाकाम) बना दिया [101] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 70 की तफ़सीर

"और उन्होंने उनके साथ एक बुरी चाल चलनी चाही थी, मगर हमने उन्हीं को सबसे ज़्यादा नुक़्सान उठाने वाला (नाकाम) बना दिया [101] ।"

[101] नमरूद और उसकी क़ौम की शर्मनाक नाकामी

काफ़िरों ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को हलाक करने की साज़िश रची थी, मगर अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से उन्हें बे-दाग़ सलामत रखा और नमरूद और उसके सरदारों को दुनिया व आख़िरत में ज़लील व रुस्वा कर दिया। नमरूद पर एक मामूली लंगड़े मच्छर को मुसल्लत किया गया जिसने उसके दिमाग़ में घुसकर उसे ऐसी ज़िल्लत की मौत दी कि वह सर पर जूते लगवाने पर मजबूर था।

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