Transliteration: (Wa ja'alnaahum a'immatany yahdoona bi amrinaa wa awhainaaa ilaihim fi'lal khairaati wa iqaamas Salaati wa eetaaa'az Zakaati wa kaanoo lanaa 'aabideen)
"और हमने उन्हें ऐसे पेशवा (इमाम) बनाया [105] जो हमारे हुक्म से (लोगों को) हिदायत देते थे, और हमने उनकी तरफ़ नेक काम करने [106], नमाज़ क़ायम करने और ज़कात देने [107] की वह्य भेजी; और वे सिर्फ़ हमारी ही इबादत करने वाले थे।"
अल्लाह तआला ने इन अंबिया को तमाम इंसानियत का इमाम और रहबर मुक़र्रर फ़रमाया ताकि लोग दीन और दुनिया के तमाम मामलों में उनकी पैरवी करें। उनकी इताअत ऐन अल्लाह की इताअत है।
अंबिया-ए-किराम पर हर लम्हा नेक आमाल की वह्य और तौफ़ीक़ नाज़िल होती रही और वे खुद भी नेकियों के अलमबरदार और मुजस्समा-ए-ख़ैर रहे।
नमाज़ बदनी इबादत की रूह है और ज़कात माली इबादत व नफ़्स की पाकीज़गी का ज़रिया है। ये दोनों इबादतें हर नबी की शरीअत में बुनियादी अहमियत की हामिल रही हैं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat