Transliteration: (Wa Lootan aatainaahu hukmanw wa 'ilmanw wa najjainaahu minal qaryatil latee kaanat ta'malul khabaaa'is; innahum kaanoo qawma saw'in faasiqeen)
"और हमने लूत को हिकमत और इल्म अता फ़रमाया [108], और उन्हें उस बस्ती से नजात दी जो गन्दे काम (बदकारी) किया करती थी [109]; बेशक वे बड़े ही बुरे, नाफ़रमान लोग थे।"
अल्लाह तआला ने हज़रत लूत को नुबुव्वत, फ़ैसले की हिकमत और अहकामे शरीअत का कामिल इल्म अता फ़रमाया ताकि वे अपनी क़ौम की रहनुमाई कर सकें।
क़ौमे लूत (सदूम के बाशिंदे) हमजिंसपरस्ती (लवातत) जैसी निहायत शर्मनाक, ग़ैर-फ़ितरी और कबीह बुराई में मुब्तला थी। हज़रत लूत ने उन्हें बहुत समझाया मगर वे बाज़ न आए। बिल-आख़िर अल्लाह ने हज़रत लूत और उनके अहले ईमान को बचा लिया और उस पूरी बस्ती को पत्थरों की बारिश और ज़मीन को उलट कर हलाक कर दिया।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat