कुरान - 21:76 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
وَنُوحًا إِذۡ نَادَىٰ مِن قَبۡلُ فَٱسۡتَجَبۡنَا لَهُۥ فَنَجَّيۡنَٰهُ وَأَهۡلَهُۥ مِنَ ٱلۡكَرۡبِ ٱلۡعَظِيمِ

Transliteration: (Wa noohan iz naadaa min qablu fastajabnaa lahoo fanajjainaahu wa ahlahoo minal karbil 'azeem)

76. और नूह को (याद कीजिए) जब उन्होंने इससे पहले (हमें) पुकारा, तो हमने उनकी दुआ क़ुबूल फ़रमाई और उन्हें और उनके अहले ख़ाना को [110] बहुत बड़ी घुटन व तकलीफ़ (तूफ़ान) से नजात दी [111] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 76 की तफ़सीर

"और नूह को (याद कीजिए) जब उन्होंने इससे पहले (हमें) पुकारा, तो हमने उनकी दुआ क़ुबूल फ़रमाई और उन्हें और उनके अहले ख़ाना को [110] बहुत बड़ी घुटन व तकलीफ़ (तूफ़ान) से नजात दी [111] ।"

[110] अहले ख़ाना से मुराद बा-ईमान अहल

यहाँ हज़रत नूह के 'अहल' से मुराद उनकी मोमिन औलाद और घर वाले हैं। उनका नाफ़रमान बेटा (कनआन) चूंकि काफ़िर था, इसलिए वह अहले नजात में शामिल न हुआ और तूफ़ान में ग़र्क़ हो गया। दीनी रिश्ता ख़ूनी रिश्ते से मुक़द्दम है।

[111] 'कर्बे अज़ीम' (बड़ी घुटन व मुसीबत) से नजात

क़ौमे नूह हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को साढ़े नौ सौ साल तक तरह-तरह की अज़ियतें देती रही, पत्थरों से मारती और मज़ाक़ उड़ाती रही। जब उनकी सरकशी इन्तेहा को पहुंच गई तो हज़रत नूह ने दुआ फ़रमाई। अल्लाह ने उन्हें कश्ती के ज़रिये अज़ीम तूफ़ान और काफ़िरों के ज़ुल्म से हमेशा के लिए नजात बख़्शी।

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