Transliteration: (Wa noohan iz naadaa min qablu fastajabnaa lahoo fanajjainaahu wa ahlahoo minal karbil 'azeem)
"और नूह को (याद कीजिए) जब उन्होंने इससे पहले (हमें) पुकारा, तो हमने उनकी दुआ क़ुबूल फ़रमाई और उन्हें और उनके अहले ख़ाना को [110] बहुत बड़ी घुटन व तकलीफ़ (तूफ़ान) से नजात दी [111] ।"
यहाँ हज़रत नूह के 'अहल' से मुराद उनकी मोमिन औलाद और घर वाले हैं। उनका नाफ़रमान बेटा (कनआन) चूंकि काफ़िर था, इसलिए वह अहले नजात में शामिल न हुआ और तूफ़ान में ग़र्क़ हो गया। दीनी रिश्ता ख़ूनी रिश्ते से मुक़द्दम है।
क़ौमे नूह हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को साढ़े नौ सौ साल तक तरह-तरह की अज़ियतें देती रही, पत्थरों से मारती और मज़ाक़ उड़ाती रही। जब उनकी सरकशी इन्तेहा को पहुंच गई तो हज़रत नूह ने दुआ फ़रमाई। अल्लाह ने उन्हें कश्ती के ज़रिये अज़ीम तूफ़ान और काफ़िरों के ज़ुल्म से हमेशा के लिए नजात बख़्शी।
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