कुरान - 21:78 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

78
وَدَاوُۥدَ وَسُلَيۡمَٰنَ إِذۡ يَحۡكُمَانِ فِي ٱلۡحَرۡثِ إِذۡ نَفَشَتۡ فِيهِ غَنَمُ ٱلۡقَوۡمِ وَكُنَّا لِحُكۡمِهِمۡ شَٰهِدِينَ

Transliteration: (Wa Daawooda wa Sulaimaana iz yahkumaani fil harsi iz nafashat feehi ghanamul qawmi wa kunnaa lihukmihim shaahideen)

78. और दाऊद और सुलैमान को (याद कीजिए) [114] जब वे दोनों एक खेती के मुआमले में फ़ैसला कर रहे थे जब रात के वक़्त उसमें किसी क़ौम की बकरियाँ (छूटकर) चर गई थीं; और हम उनके फ़ैसले के गवाह थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 78 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 78 की तफ़सीर

"और दाऊद और सुलैमान को (याद कीजिए) [114] जब वे दोनों एक खेती के मुआमले में फ़ैसला कर रहे थे जब रात के वक़्त उसमें किसी क़ौम की बकरियाँ (छूटकर) चर गई थीं; और हम उनके फ़ैसले के गवाह थे।"

[114] खेत चर जाने का मुक़द्दमा और दोनों अंबिया का फ़ैसला

हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की अदालत में एक मुक़द्दमा पेश हुआ: एक शख़्स के अंगूर के बाग़ या खेत में रात के वक़्त दूसरे शख़्स की बकरियाँ घुस गईं और पूरी फ़सल चरकर बर्बाद कर दी।

हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) ने यह फ़ैसला फ़रमाया कि चूंकि फ़सल का नुक़्सान बकरियों की क़ीमत के बराबर है, लिहाज़ा हर्जाने के तौर पर सारी बकरियाँ खेत वाले को दे दी जाएं। उस वक़्त हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) की उम्र सिर्फ़ ग्यारह साल थी और वे भी वहाँ मौजूद थे।

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