कुरान - 21:80 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

80
وَعَلَّمۡنَٰهُ صَنۡعَةَ لَبُوسٖ لَّكُمۡ لِتُحۡصِنَكُم مِّنۢ بَأۡسِكُمۡۖ فَهَلۡ أَنتُمۡ شَٰكِرُونَ

Transliteration: (Wa 'allamnaahu san'ata laboosil lakum lituhsinakum min ba'sikum fahal antum shaakiroon)

80. और हमने उन्हें तुम्हारे लिए ज़िरह (लोहे की जंगी पोशाक) बनाने की कारीगरी सिखाई [118] ताकि वह तुम्हें तुम्हारी लड़ाई में (हथियारों से) महफ़ूज़ रखे; तो क्या तुम शुक्रगुज़ार बनोगे [119]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 80 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 80 की तफ़सीर

"और हमने उन्हें तुम्हारे लिए ज़िरह (लोहे की जंगी पोशाक) बनाने की कारीगरी सिखाई [118] ताकि वह तुम्हें तुम्हारी लड़ाई में (हथियारों से) महफ़ूज़ रखे; तो क्या तुम शुक्रगुज़ार बनोगे [119]?"

[118] ज़िरह बनाने की सन्नत और लोहे का मोम होना

अल्लाह तआला ने हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) के मुबारक हाथों में यह मोजिज़ाह रखा था कि सख़्त लोहा उनके हाथों में मोम की तरह नर्म हो जाता था। वे बग़ैर आग और हथौड़े के अपनी उंगलियों से लोहे की कड़ियाँ जोड़कर ज़िरह (bullet-proof/weapon-proof armour) तैयार करते थे। यह जंग में हिफ़ाज़त की पहली ईजाद थी।

[119] दस्तकारी और हलाले दस्त-रंज का दर्स

हज़रत दाऊद बादशाह और नबी होने के बावजूद बैतुल-माल से कुछ नहीं लेते थे, बल्कि अपने हाथों से ज़िरहें बनाकर और बेचकर हलाल रोज़ी कमाते थे। इससे साबित हुआ कि अपने हाथ की मेहनत से कमाना अंबिया की अज़ीम सुन्नत है।

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