कुरान - 21:82 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
وَمِنَ ٱلشَّيَٰطِينِ مَن يَغُوصُونَ لَهُۥ وَيَعۡمَلُونَ عَمَلٗا دُونَ ذَٰلِكَۖ وَكُنَّا لَهُمۡ حَٰفِظِينَ

Transliteration: (Wa minash Shayaateeni mai yaghoosoona lahoo wa ya'maloona 'amalan doona zaalika wa kunna lahum haafizeen)

82. और शैतानों (जिन्नात) में से भी ऐसे थे जो उनके लिए (समन्दर में) गोता लगाते थे [122] और इसके सिवा दूसरे (इमारतसाज़ी के) काम करते थे [123]; और हम ही उनके निगराँ थे [124] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 82 की तफ़सीर

"और शैतानों (जिन्नात) में से भी ऐसे थे जो उनके लिए (समन्दर में) गोता लगाते थे [122] और इसके सिवा दूसरे (इमारतसाज़ी के) काम करते थे [123]; और हम ही उनके निगराँ थे [124] ।"

[122] जिन्नात से मोतियों के लिए ग़ौताख़ोरी

सरकश शयातीन और जिन्नात हज़रत सुलैमान के ऐसे ताबेअ थे कि उनके हुक्म से समन्दर की अथा गहराइयों में गोता लगाकर मोती, जवाहरात और क़ीमती चीज़ें निकाल कर लाते थे।

[123] अज़ीमुश्शान इमारतों की तामीर

गोताख़ोरी के अलावा वे बैतुल-मुक़द्दस की तामीर, बड़े-बड़े हौज, तांबे के बर्तन और आलीशान महल्लात की तामीर जैसे भारी काम अंजाम देते थे जो इंसानी ताक़त से बाहर थे।

[124] जिन्नात पर कुदरते इलाही की निगरानी

अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि हम खुद उन जिन्नात की निगरानी फ़रमाते थे ताकि वे हज़रत सुलैमान के हुक्म से सरताबी न कर सकें और न किसी काम में ख़लल डाल सकें।

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