Transliteration: (Wa Ayyooba iz naadaa Rabbahooo annee massaniyad durru wa Anta arhamur raahimeen)
"और अय्यूब को (याद कीजिए) [125] जब उन्होंने अपने रब को पुकारा कि 'बेशक मुझे बड़ी तकलीफ़ पहुंची है, और तू सबसे बढ़कर रहम फ़रमाने वाला है [126]!'"
हज़रत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) शाम के इलाक़े में साहिबे माल व औलाद नबी थे। अल्लाह तआला ने सब्र के इम्तिहान के लिए उनकी तमाम दौलत, मवेशी और औलाद को वापस ले लिया और उनके जिस्म में शदीद बीमारी मुब्तला फ़रमा दी। इस आज़माइश में आपने ऐसा बे-मिसाल सब्र फ़रमाया कि तारीख़ में 'सब्रे अय्यूब' ज़रबुल-मसल बन गया।
सालों की आज़माइश के बाद जब आपने दुआ की, तो शिकवे का एक लफ़्ज़ भी ज़बान पर न लाए, बल्कि सिर्फ़ अपना हाल अर्ज़ किया: 'अन्नी मस्सनि-यद्-दुर्रु व अन्ता अरहमुर-राहिमीन' (मुझे तकलीफ़ पहुंची है और तू सबसे बढ़कर रहम करने वाला है)। अल्लाह की सिफ़ते रहमत को वसीला बनाकर दुआ मांगना दुआ की क़बूलियत का अज़ीम दर्स है।
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