Transliteration: (Wa li Sulaimaanar reeha 'aasifatan tajree bi amriheee ilal ardil latee baaraknaa feehaa; wa kunnaa bikulli shai'in 'aalimeen)
"और सुलैमान के लिए हमने तेज़ हवा को ताबेअ कर दिया था जो उनके हुक्म से चलती थी [120] उस सरज़मीन (शाम) की तरफ़ जिसमें हमने बरकत रखी है [121]; और हम हर चीज़ के जानने वाले हैं।"
अल्लाह तआला ने तेज़ और तुंद हवा को हज़रत सुलैमान के हुक्म का ताबेअ फ़रमा दिया था। वे अपने तख़्त पर लश्कर और साज़ो-सामान समेत सवार होते और हवा को जिस तरफ़ चलने का हुक्म फ़रमाते, वह उन्हें उड़ाकर ले जाती थी। सुबह से दोपहर तक एक महीने की मुसाफ़त और दोपहर से शाम तक दूसरे महीने की मुसाफ़त तय हो जाती थी।
हवा उनके हुक्म से शाम की मुबारक सरज़मीन की तरफ़ और जहाँ वे चाहते रवानी के साथ चलती थी। यह अल्लाह की क़ुदरत और हज़रत सुलैमान का खुला मोजिज़ाह था।
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