कुरान - 21:81 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

81
وَلِسُلَيۡمَٰنَ ٱلرِّيحَ عَاصِفَةٗ تَجۡرِي بِأَمۡرِهِۦٓ إِلَى ٱلۡأَرۡضِ ٱلَّتِي بَٰرَكۡنَا فِيهَاۚ وَكُنَّا بِكُلِّ شَيۡءٍ عَٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa li Sulaimaanar reeha 'aasifatan tajree bi amriheee ilal ardil latee baaraknaa feehaa; wa kunnaa bikulli shai'in 'aalimeen)

81. और सुलैमान के लिए हमने तेज़ हवा को ताबेअ कर दिया था जो उनके हुक्म से चलती थी [120] उस सरज़मीन (शाम) की तरफ़ जिसमें हमने बरकत रखी है [121]; और हम हर चीज़ के जानने वाले हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 81 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 81 की तफ़सीर

"और सुलैमान के लिए हमने तेज़ हवा को ताबेअ कर दिया था जो उनके हुक्म से चलती थी [120] उस सरज़मीन (शाम) की तरफ़ जिसमें हमने बरकत रखी है [121]; और हम हर चीज़ के जानने वाले हैं।"

[120] हवा पर हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) की हुकूमत

अल्लाह तआला ने तेज़ और तुंद हवा को हज़रत सुलैमान के हुक्म का ताबेअ फ़रमा दिया था। वे अपने तख़्त पर लश्कर और साज़ो-सामान समेत सवार होते और हवा को जिस तरफ़ चलने का हुक्म फ़रमाते, वह उन्हें उड़ाकर ले जाती थी। सुबह से दोपहर तक एक महीने की मुसाफ़त और दोपहर से शाम तक दूसरे महीने की मुसाफ़त तय हो जाती थी।

[121] बरकत वाली ज़मीन (शाम)

हवा उनके हुक्म से शाम की मुबारक सरज़मीन की तरफ़ और जहाँ वे चाहते रवानी के साथ चलती थी। यह अल्लाह की क़ुदरत और हज़रत सुलैमान का खुला मोजिज़ाह था।

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