Transliteration: (Wa nasarnaahu minal qawmil lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa; innahum kaanoo qawma saw'in fa-aghraq naahum ajma'een)
"और हमने उस क़ौम के मुक़ाबले में उनकी मदद की जिन्होंने हमारी आयतों को झुठला दिया था [112]; बेशक वे बड़े बुरे लोग थे, तो हमने उन सबको (पानी में) ग़र्क़ कर दिया [113] ।"
अल्लाह तआला ने हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की भरपूर मदद फ़रमाई और उनकी तकज़ीब करने वालों के मुक़ाबले में उन्हें हक़ व बातिल की इस जंग में फ़तहयाब फ़रमाया।
हज़रत नूह की दुआ के नतीजे में ज़मीन से चश्मे उबल पड़े और आसमान से मूसलाधार बारिश हुई। पूरी दुनिया पानी में डूब गई और रू-ए-ज़मीन पर एक भी काफ़िर बाक़ी न बचा। यह अल्लाह के इन्तिक़ाम और अदल का खुला मुज़ाहरा था।
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