कुरान - 21:77 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
وَنَصَرۡنَٰهُ مِنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَوۡمَ سَوۡءٖ فَأَغۡرَقۡنَٰهُمۡ أَجۡمَعِينَ

Transliteration: (Wa nasarnaahu minal qawmil lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa; innahum kaanoo qawma saw'in fa-aghraq naahum ajma'een)

77. और हमने उस क़ौम के मुक़ाबले में उनकी मदद की जिन्होंने हमारी आयतों को झुठला दिया था [112]; बेशक वे बड़े बुरे लोग थे, तो हमने उन सबको (पानी में) ग़र्क़ कर दिया [113] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 77 की तफ़सीर

"और हमने उस क़ौम के मुक़ाबले में उनकी मदद की जिन्होंने हमारी आयतों को झुठला दिया था [112]; बेशक वे बड़े बुरे लोग थे, तो हमने उन सबको (पानी में) ग़र्क़ कर दिया [113] ।"

[112] नुसरते इलाही और अंबिया का ग़लबा

अल्लाह तआला ने हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की भरपूर मदद फ़रमाई और उनकी तकज़ीब करने वालों के मुक़ाबले में उन्हें हक़ व बातिल की इस जंग में फ़तहयाब फ़रमाया।

[113] काफ़िरों का मुकम्मल ग़र्क़ाव

हज़रत नूह की दुआ के नतीजे में ज़मीन से चश्मे उबल पड़े और आसमान से मूसलाधार बारिश हुई। पूरी दुनिया पानी में डूब गई और रू-ए-ज़मीन पर एक भी काफ़िर बाक़ी न बचा। यह अल्लाह के इन्तिक़ाम और अदल का खुला मुज़ाहरा था।

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