Transliteration: (Wa izaa tutlaa 'alaihim Aayaatunaa qaaloo qad sami'naa law nashaaa'u laqulnaa misla haazaaa in haazaaa illaaa asaateerul awwaleen)
यह आयत नज़्र बिन हारिस के बारे में नाज़िल हुई।
वह घमंड से कहता था कि
कुरआन इंसानों की बनाई हुई बात है,
और अगर वह चाहे तो इसके जैसी बातें खुद गढ़ सकता है।
लेकिन यह केवल ख़ाली दावे थे।
क्योंकि कुरआन ने अरब के सबसे बड़े शायरों और फ़सीह-ओ-बलीग़ लोगों को
चुनौती दी थी कि वे इसकी तरह
एक सूरत ही बना कर दिखाएँ –
मगर कोई नाकामयाब रहा।
उनका कहना कि यह अक़दामीन की कहानियाँ हैं,
सिर्फ़ हठ और इन्कार था,
वरना कुरआन की फ़साहत, बलाग़त, हक़ीक़त और हिकमत
खुली हुई दलीलें थीं।
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