Transliteration: (Yas'aloonaka 'anil anfaali qulil anfaalu lillaahi war Rasooli fattaqul laaha wa aslihoo zaata bainikum wa atee'ul laaha wa Rasoolahooo in kuntum mu'mineen)
अनफ़ाल शब्द, नफ़्ल का बहुवचन है जिसका अर्थ है "अतिरिक्त" या "ज़्यादा"। ग़नीमत को अनफ़ाल कहा गया क्योंकि यह जिहाद करने वालों के लिए आत्मिक सवाब के अतिरिक्त इनाम है। यह नेमत केवल इस उम्मत को मिली है, पूर्व क़ौमें इससे वंचित रहीं। बद्र की जंग के बाद जब ग़नीमत के बँटवारे पर मतभेद हुआ तो अल्लाह ने फैसला रसूल ﷺ पर छोड़ा और आपने सब में बराबरी से बाँट दिया।
आयत में ग़नीमत को पहले अल्लाह की ओर और फिर रसूल ﷺ की ओर जोड़ा गया है। इससे पता चलता है कि इसकी पवित्रता अल्लाह से है और फैसले का हक़ रसूल ﷺ को है। अल्लाह मालिक है और रसूल ﷺ उनके नियुक्त बाँटने वाले हैं।
आयत का हिस्सा तो अल्लाह से डरते रहो यह बताता है कि ग़नीमत जैसी दुनियावी चीज़ों में झगड़े न करो। मतभेद से फूट और कमज़ोरी आती है। मोमिन का काम है कि रसूल ﷺ के फैसले को बिना आपत्ति मान ले।
आयत का यह हिस्सा दर्शाता है कि असल ईमान का मतलब है अल्लाह के हुक्म और रसूल ﷺ की सुन्नत की पूरी पाबंदी। अल्लाह के हुक्म क़ानून हैं और रसूल ﷺ का तरीका उसका अमली नमूना। इस तरह रसूल ﷺ की इताअत ईमान की असल कसौटी है।
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