कुरान - 8:1 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
يَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلۡأَنفَالِۖ قُلِ ٱلۡأَنفَالُ لِلَّهِ وَٱلرَّسُولِۖ فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَصۡلِحُواْ ذَاتَ بَيۡنِكُمۡۖ وَأَطِيعُواْ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Yas'aloonaka 'anil anfaali qulil anfaalu lillaahi war Rasooli fattaqul laaha wa aslihoo zaata bainikum wa atee'ul laaha wa Rasoolahooo in kuntum mu'mineen)

वे आपसे ग़नीमत [1] के बारे में पूछते हैं। कह दीजिए कि ग़नीमत अल्लाह और उसके रसूल के लिए है [2]। तो अल्लाह से डरते रहो [3], आपस में अपने रिश्ते सुधारो और अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो, यदि तुम मोमिन हो [4]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 1 की तफ़्सीर

✅ [1] अनफ़ाल का अर्थ और महत्व

अनफ़ाल शब्द, नफ़्ल का बहुवचन है जिसका अर्थ है "अतिरिक्त" या "ज़्यादा"। ग़नीमत को अनफ़ाल कहा गया क्योंकि यह जिहाद करने वालों के लिए आत्मिक सवाब के अतिरिक्त इनाम है। यह नेमत केवल इस उम्मत को मिली है, पूर्व क़ौमें इससे वंचित रहीं। बद्र की जंग के बाद जब ग़नीमत के बँटवारे पर मतभेद हुआ तो अल्लाह ने फैसला रसूल ﷺ पर छोड़ा और आपने सब में बराबरी से बाँट दिया।

✅ [2] अल्लाह और रसूल की हक़दारी

आयत में ग़नीमत को पहले अल्लाह की ओर और फिर रसूल ﷺ की ओर जोड़ा गया है। इससे पता चलता है कि इसकी पवित्रता अल्लाह से है और फैसले का हक़ रसूल ﷺ को है। अल्लाह मालिक है और रसूल ﷺ उनके नियुक्त बाँटने वाले हैं।

✅ [3] झगड़े से बचने की ताकीद

आयत का हिस्सा तो अल्लाह से डरते रहो यह बताता है कि ग़नीमत जैसी दुनियावी चीज़ों में झगड़े न करो। मतभेद से फूट और कमज़ोरी आती है। मोमिन का काम है कि रसूल ﷺ के फैसले को बिना आपत्ति मान ले।

✅ [4] सच्ची इताअत की हकीकत

आयत का यह हिस्सा दर्शाता है कि असल ईमान का मतलब है अल्लाह के हुक्म और रसूल ﷺ की सुन्नत की पूरी पाबंदी। अल्लाह के हुक्म क़ानून हैं और रसूल ﷺ का तरीका उसका अमली नमूना। इस तरह रसूल ﷺ की इताअत ईमान की असल कसौटी है।

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