कुरान - 8:4 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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أُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ حَقّٗاۚ لَّهُمۡ دَرَجَٰتٌ عِندَ رَبِّهِمۡ وَمَغۡفِرَةٞ وَرِزۡقٞ كَرِيمٞ

Transliteration: (Ulaaa'ika humul mu'minoona haqqaa; lahum darajaatun 'inda Rabbihim wa magh firatunw wa rizqun kareem)

यही लोग सच्चे मोमिन हैं। इनके लिए उनके रब के पास उच्च दर्जे, मग़फ़िरत और इज़्ज़त वाला रिज़्क़ है [9]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 4 की तफ़्सीर

✅ [9] सच्चे मोमिनों का इनाम

ये ही असल मोमिन हैं जिन्हें अल्लाह ने बदले में तीन बड़ी नेमतें दीं:

  1. उच्च दर्जे – दुनिया और आख़िरत में बुलंदी और इज़्ज़त।
  2. मग़फ़िरत – पिछले गुनाहों की पूरी माफी।
  3. इज़्ज़त वाला रिज़्क़ – दुनिया में हलाल और पवित्र रोज़ी तथा आख़िरत में जन्नत की नेमतें।

यह सब उनकी सच्ची ईमानदारी और इताअत का इनाम है।

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