कुरान - 8:3 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ يُنفِقُونَ

Transliteration: (Allazeena yuqeemoonas Salaata wa mimmaa razaqnaahum yunfiqoon)

वे नमाज़ क़ायम करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं [8]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 3 की तफ़्सीर

✅ [8] इबादत और इनफ़ाक़ में पूरा समर्पण

यह आयत सच्चे मोमिन की दो बुनियादी ख़ासियतें बताती है:

  1. नमाज़ क़ायम करना – इसका मतलब है कि नमाज़ को समय पर, सही तौर पर, पूरे ख़ुशू-ख़ुज़ू और सच्चे इरादे से अदा किया जाए। इसमें फ़र्ज़ और वाजिब दोनों शामिल हैं। नमाज़ बोझ समझकर नहीं बल्कि मोहब्बत और इताअत के साथ पढ़ी जाए।
  2. अल्लाह की दी हुई रोज़ी में से ख़र्च करना – इसका अर्थ है हलाल कमाई से ख़र्च करना, ज़कात, सदक़ा, घर-परिवार की ज़रूरतें और नेक कामों में माल खर्च करना। यह सिर्फ़ एक बार नहीं बल्कि लगातार होता रहे, ताकि अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा हो।

इस तरह इबादत और इनफ़ाक़ का संतुलन, सच्चे ईमान वालों की पहचान है।

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