Transliteration: (Innamal mu'minoonal lazeena izaa zukiral laahu wajilat quloobuhum wa izaa tuliyat 'alaihim Aayaatuhoo zaadat hum eemaananw wa 'alaa Rabbihim yatawakkaloon)
सच्चा मोमिन वह है जिसका दिल अल्लाह के ज़िक्र से ख़ौफ़ और अदब से कांप उठे। उसकी सिफ़ात का ज़िक्र दिल में रौब और श्रद्धा पैदा करे, उसकी सज़ा का बयान डर दिलाए और उसकी रहमत की आयतें उम्मीद और मोहब्बत भर दें। ऐसा दिल आँसुओं से भीग सकता है। यह बताता है कि जिस दिल में अल्लाह की मोहब्बत और जुड़ाव न हो, उसमें पूरा ईमान नहीं।
इस हिस्से से मालूम होता है कि ईमान स्थिर नहीं है बल्कि बढ़ता है। कुरआन सुनना, समझना और उस पर अमल करना ईमान को मजबूत करता है। अच्छे काम ईमान की गुज़ारिश और ताक़त हैं। जो दिल कुरआन से जुड़ते हैं, वे बदलते और ऊँचाई पाते हैं।
तवक्कुल दो तरह का है:
यह आयत उन मोमिनों की तारीफ़ करती है जो हर हाल में अपना दिल सिर्फ़ अल्लाह से जोड़ते हैं।
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