कुरान - 8:2 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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إِنَّمَا ٱلۡمُؤۡمِنُونَ ٱلَّذِينَ إِذَا ذُكِرَ ٱللَّهُ وَجِلَتۡ قُلُوبُهُمۡ وَإِذَا تُلِيَتۡ عَلَيۡهِمۡ ءَايَٰتُهُۥ زَادَتۡهُمۡ إِيمَٰنٗا وَعَلَىٰ رَبِّهِمۡ يَتَوَكَّلُونَ

Transliteration: (Innamal mu'minoonal lazeena izaa zukiral laahu wajilat quloobuhum wa izaa tuliyat 'alaihim Aayaatuhoo zaadat hum eemaananw wa 'alaa Rabbihim yatawakkaloon)

सच्चे मोमिन वही हैं जिनके दिल कांप उठते हैं जब अल्लाह का ज़िक्र होता है [5], और जब उसकी आयतें उनके सामने पढ़ी जाती हैं तो उनका ईमान बढ़ जाता है [6], और वे अपने रब पर भरोसा करते हैं [7]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 2 की तफ़्सीर

✅ [5] सच्चे ईमान वालों की निशानी: कांपते दिल

सच्चा मोमिन वह है जिसका दिल अल्लाह के ज़िक्र से ख़ौफ़ और अदब से कांप उठे। उसकी सिफ़ात का ज़िक्र दिल में रौब और श्रद्धा पैदा करे, उसकी सज़ा का बयान डर दिलाए और उसकी रहमत की आयतें उम्मीद और मोहब्बत भर दें। ऐसा दिल आँसुओं से भीग सकता है। यह बताता है कि जिस दिल में अल्लाह की मोहब्बत और जुड़ाव न हो, उसमें पूरा ईमान नहीं।

✅ [6] कुरआन और अच्छे कामों से ईमान का बढ़ना

इस हिस्से से मालूम होता है कि ईमान स्थिर नहीं है बल्कि बढ़ता है। कुरआन सुनना, समझना और उस पर अमल करना ईमान को मजबूत करता है। अच्छे काम ईमान की गुज़ारिश और ताक़त हैं। जो दिल कुरआन से जुड़ते हैं, वे बदलते और ऊँचाई पाते हैं।

✅ [7] अल्लाह पर भरोसा: ज़रिए के साथ और बिना ज़रिए के

तवक्कुल दो तरह का है:

  1. ज़रिए के साथ – आम मोमिन वजहें अपनाते हैं और नतीजा अल्लाह पर छोड़ते हैं।
  2. बिना ज़रिए के – ख़ास मोमिन पूरे तौर पर अल्लाह पर भरोसा करते हैं चाहे साधन हों या न हों।

यह आयत उन मोमिनों की तारीफ़ करती है जो हर हाल में अपना दिल सिर्फ़ अल्लाह से जोड़ते हैं।

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