Transliteration: (Wa iz ya'idukumul laahu ihdat taaa'ifataini annahaa lakum wa tawaddoona anna ghaira zaatish shawkati takoonu lakum wa yureedul laahu ai yuhiqqal haqqa bikalimaatihee wa yaqta'a daabiral kaafireen)
यहाँ दो टकराव की संभावना बताई गई: एक तो अबू सुफ़यान का काफ़िला, जो माल-ए-तिज़ारत से भरा और कमज़ोर पहरे वाला था; दूसरा अबू जहल का अच्छी तरह से लैस लश्कर। अल्लाह ने मुसलमानों को भरोसा दिलाया था कि इन दोनों में से एक उनके हाथ लगेगा।
मुसलमान जंग के इरादे से नहीं बल्कि काफ़िले को रोकने के लिए निकले थे। उनकी ख्वाहिश थी कि बिना हथियार वाला काफ़िला हाथ लगे और माल मुसलमानों के काम आए। मगर अल्लाह ने अबू सुफ़यान को बचा लिया और मुसलमानों का सामना पूरी तरह तैयार दुश्मन से हुआ। इंसान की राय काफ़िले की ओर थी लेकिन अल्लाह की हिकमत में बड़ा मक़सद छिपा था।
अल्लाह चाहता था कि बद्र की जंग हो, ताकि:
इस तरह जो शुरू में मुसलमानों को मुश्किल लगा, वही उनकी इज़्ज़त और फ़तह का ज़रिया बना।
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