कुरान - 8:7 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَإِذۡ يَعِدُكُمُ ٱللَّهُ إِحۡدَى ٱلطَّآئِفَتَيۡنِ أَنَّهَا لَكُمۡ وَتَوَدُّونَ أَنَّ غَيۡرَ ذَاتِ ٱلشَّوۡكَةِ تَكُونُ لَكُمۡ وَيُرِيدُ ٱللَّهُ أَن يُحِقَّ ٱلۡحَقَّ بِكَلِمَٰتِهِۦ وَيَقۡطَعَ دَابِرَ ٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Wa iz ya'idukumul laahu ihdat taaa'ifataini annahaa lakum wa tawaddoona anna ghaira zaatish shawkati takoonu lakum wa yureedul laahu ai yuhiqqal haqqa bikalimaatihee wa yaqta'a daabiral kaafireen)

और याद करो जब अल्लाह ने तुमसे वादा किया था कि दो गिरोहों [13] में से एक तुम्हारा होगा, और तुम चाहते थे कि वह तुम्हें मिले जो बिना हथियारों वाला था [14], लेकिन अल्लाह चाहता था कि अपने कलाम के ज़रिए हक़ क़ायम करे और काफ़िरों की जड़ काट दे [15]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 7 की तफ़्सीर

✅ [13] दो गिरोह: काफ़िला और लश्कर

यहाँ दो टकराव की संभावना बताई गई: एक तो अबू सुफ़यान का काफ़िला, जो माल-ए-तिज़ारत से भरा और कमज़ोर पहरे वाला था; दूसरा अबू जहल का अच्छी तरह से लैस लश्कर। अल्लाह ने मुसलमानों को भरोसा दिलाया था कि इन दोनों में से एक उनके हाथ लगेगा।

✅ [14] इंसानी इच्छा और अल्लाह की हिकमत

मुसलमान जंग के इरादे से नहीं बल्कि काफ़िले को रोकने के लिए निकले थे। उनकी ख्वाहिश थी कि बिना हथियार वाला काफ़िला हाथ लगे और माल मुसलमानों के काम आए। मगर अल्लाह ने अबू सुफ़यान को बचा लिया और मुसलमानों का सामना पूरी तरह तैयार दुश्मन से हुआ। इंसान की राय काफ़िले की ओर थी लेकिन अल्लाह की हिकमत में बड़ा मक़सद छिपा था।

✅ [15] अल्लाह का इरादा: हक़ की जीत

अल्लाह चाहता था कि बद्र की जंग हो, ताकि:

  1. हक़ क़ायम हो
  2. क़ुरैश के सरदार मारे जाएँ
  3. ग़नीमत मुसलमानों को मिले
  4. क़ैदी पकड़े जाएँ, जिनमें से कई बाद में इस्लाम लाए

इस तरह जो शुरू में मुसलमानों को मुश्किल लगा, वही उनकी इज़्ज़त और फ़तह का ज़रिया बना।

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