Transliteration: (Iz tastagheesoona Rabbakum fastajaaba lakum annee mumiddukum bi alfim minal malaaa'ikati murdifeen)
जब मुसलमानों ने बद्र में काफ़िरों की ज़्यादती तादाद देखी तो रसूल ﷺ ने गिड़गिड़ाकर दुआ की: “ऐ अल्लाह! अगर यह छोटा सा गिरोह नष्ट हो गया तो ज़मीन पर कोई तेरा इबादत करने वाला न रहेगा।” अल्लाह ने इस दुआ को पूरी उम्मत की पुकार माना और फरमाया: “तुम अपने रब से फरियाद कर रहे थे।”
अल्लाह ने इस दुआ के जवाब में पहले एक हज़ार फ़रिश्ते भेजे। बाद की आयतों में जिक्र है कि यह तादाद तीन हज़ार और फिर पाँच हज़ार फ़रिश्तों तक पहुँची। सहाबा ने जंग में अजीब मदद देखी — काफ़िर अचानक भागने लगे, कुछ पर अदृश्य चोटें पड़ीं और दुश्मनों के गिरने से पहले कोड़ों जैसी आवाज़ें सुनाई दीं। यह सब फ़रिश्तों की मदद के साफ़ निशान थे।
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