कुरान - 8:10 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَمَا جَعَلَهُ ٱللَّهُ إِلَّا بُشۡرَىٰ وَلِتَطۡمَئِنَّ بِهِۦ قُلُوبُكُمۡۚ وَمَا ٱلنَّصۡرُ إِلَّا مِنۡ عِندِ ٱللَّهِۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ

Transliteration: (Wa maa ja'alahul laahu illaa bushraa wa litatma'inna bihee quloobukum; wa man nasru illaa min 'indil laah; innal laaha Azeezun Hakeem)

और अल्लाह ने इसे सिर्फ़ तुम्हें ख़ुशख़बरी देने और ताकि तुम्हारे दिलों को इत्मिनान हो जाए, इसी लिए किया था। और फ़तह तो सिर्फ़ अल्लाह ही से है [20]। बेशक अल्लाह ग़ालिब और हिकमत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 10 की तफ़्सीर

✅ [20] फ़रिश्ते तसल्ली के लिए, ज़रूरत के लिए नहीं

यह आयत साफ़ कर देती है कि फ़रिश्तों का भेजा जाना जंग की ज़रूरत से नहीं था, क्योंकि एक फ़रिश्ता ही सारे काफ़िरों को तबाह कर सकता था। बल्कि उनका भेजा जाना दो मक़सद से था:

  1. यह मुसलमानों के लिए ख़ुशख़बरी और दिलों की तसल्ली बने।
  2. बद्र के सहाबा की अज़मत जाहिर हो कि फ़रिश्ते उनके साथ लड़ाई में शरीक हुए।

रसूल ﷺ की क़ियादत में फ़रिश्तों का उतरना उनके उच्च मक़ाम और अल्लाह की दी हुई नेतृत्व की इज़्ज़त को दिखाता है। लेकिन आख़िरकार फ़तह और कामयाबी सिर्फ़ अल्लाह ही से है, वही ग़ालिब और हिकमत वाला है।

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