Transliteration: (Iz yughashsheekumun nu'assa amanatam minhu wa yunazzilu 'alaikum minas samaaa'i maaa'al liyutah hirakum bihee wa yuzhiba 'ankum rijzash Shaitaani wa liyarbita 'ala quloobikum wa yusabbita bihil aqdaam)
बद्र के मौक़े पर मुसलमानों को अल्लाह ने हल्की ऊँघ दी। इससे उनके दिलों को इत्मिनान मिला और डर दूर हो गया। मुनाफ़िक़ इससे महरूम रहे और बेचैन रहे। जंग और बहस में यह अमन की निशानी है, मगर नमाज़ में यह शैतान की तरफ़ से होती है।
मुसलमानों के पास पानी की कमी थी। अल्लाह ने बारिश बरसाई ताकि वे वुज़ू और ग़ुस्ल कर सकें और हर तरह की नापाकी दूर हो। यह उस हालत को भी दूर कर दे जिसमें इंसान जनाबत की वजह से नापाक होता है।
"शैतान की गंदगी" से मुराद बुरे ख्यालात और शक़ हैं। कुछ लोगों के दिल में शैतान ने यह डाल दिया कि यह मुश्किल अल्लाह की नाराज़गी की वजह से है। मगर बारिश ने यह शक दूर कर दिया और उनके दिलों को तसल्ली मिली।
बद्र की ज़मीन रेतीली थी। बारिश ने उसे सख़्त कर दिया ताकि मुसलमानों के क़दम मज़बूत रहें। इसी तरह उनके दिल भी अल्लाह ने मज़बूत कर दिए ताकि वे जंग में पूरे इरादे के साथ डट जाएँ।
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