Transliteration: (Zaalika bi annahum shaaaqqul laaha wa Rasoolah; wa mai yushaqiqil laaha wa Rasoolahoo fa innal laaha shadeedul 'iqaab)
इस आयत में साफ़ किया गया कि काफ़िरों की शिकस्त और सज़ा उनकी अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की मुख़ालफ़त की वजह से थी। मुसलमान का ग़ज़ब (ग़ुस्सा) जंग में सिर्फ़ दीन की हिफ़ाज़त के लिए होना चाहिए, न कि शख़्सी दुश्मनी के लिए। इस्लाम में जंग का मक़सद हक़ और दीन को क़ायम करना है, न कि ज़मीन या दौलत हासिल करना। दुनियावी मक़सद के लिए जंग फ़साद है, जबकि अल्लाह की राह में जंग असल जिहाद है।
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