कुरान - 8:13 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ شَآقُّواْ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥۚ وَمَن يُشَاقِقِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ فَإِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ

Transliteration: (Zaalika bi annahum shaaaqqul laaha wa Rasoolah; wa mai yushaqiqil laaha wa Rasoolahoo fa innal laaha shadeedul 'iqaab)

यह (सज़ा) इसलिए हुई कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का इन्कार और मुक़ाबला किया [29]। और जो कोई अल्लाह और उसके रसूल का मुक़ाबला करेगा, तो बेशक अल्लाह की सज़ा बहुत सख़्त है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 13 की तफ़्सीर

✅ [29] ईमान की हिफ़ाज़त के लिए जंग, न कि नफ़्स के लिए

इस आयत में साफ़ किया गया कि काफ़िरों की शिकस्त और सज़ा उनकी अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की मुख़ालफ़त की वजह से थी। मुसलमान का ग़ज़ब (ग़ुस्सा) जंग में सिर्फ़ दीन की हिफ़ाज़त के लिए होना चाहिए, न कि शख़्सी दुश्मनी के लिए। इस्लाम में जंग का मक़सद हक़ और दीन को क़ायम करना है, न कि ज़मीन या दौलत हासिल करना। दुनियावी मक़सद के लिए जंग फ़साद है, जबकि अल्लाह की राह में जंग असल जिहाद है।

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