Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo izaa laqeetumul lazeena kafaroo zahfan falaa tuwalloohumul adbaar)
यहाँ "ज़हफ़न" से मुराद है बड़ी तादाद में दुश्मन की पेशक़दमी।
इस आयत में ईमान वालों को हुक्म दिया गया कि जब दीन के लिए जंग हो, तो दुश्मन के सामने डटे रहो और जंग से पीठ फेरना हराम है।
हाँ, अगर लड़ाई दुनियावी या सियासी मसअले में हो और मुसलमान पीछे हट जाएँ या सुलह कर लें, तो यह भी नेक अमल हो सकता है, क्योंकि भलाई के लिए अम्न क़ायम करना इस्लाम में फ़ज़ीलत रखता है।
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