कुरान - 8:15 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِذَا لَقِيتُمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ زَحۡفٗا فَلَا تُوَلُّوهُمُ ٱلۡأَدۡبَارَ

Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo izaa laqeetumul lazeena kafaroo zahfan falaa tuwalloohumul adbaar)

ऐ ईमान वालो! जब तुम काफ़िरों की उस फ़ौज से आमना-सामना करो जो लड़ाई के लिए पेश क़दम हो, तो उनसे अपनी पीठ न फेरो [31]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 15 की तफ़्सीर

✅ [31] जंग से भागने की मनाही

यहाँ "ज़हफ़न" से मुराद है बड़ी तादाद में दुश्मन की पेशक़दमी।
इस आयत में ईमान वालों को हुक्म दिया गया कि जब दीन के लिए जंग हो, तो दुश्मन के सामने डटे रहो और जंग से पीठ फेरना हराम है।
हाँ, अगर लड़ाई दुनियावी या सियासी मसअले में हो और मुसलमान पीछे हट जाएँ या सुलह कर लें, तो यह भी नेक अमल हो सकता है, क्योंकि भलाई के लिए अम्न क़ायम करना इस्लाम में फ़ज़ीलत रखता है।

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