Transliteration: (Wa mai yuwallihim yawma'izin duburahooo illaa mutaharrifal liqitaalin aw mutahaiyizan ilaa fi'atin faqad baaa'a bighadabim minal laahi wa ma'waahu Jahannamu wa bi'sal maseer)
इस आयत में बयान है कि जंग के मैदान से बिना वजह भागना बड़ा गुनाह है और यह अल्लाह के ग़ज़ब को लाता है।
भले दुश्मन की तादाद ज़्यादा क्यों न हो, ईमान वालों पर डटे रहना फ़र्ज़ है।
मोमिन के लिए मौत भी शहादत है, इसलिए भागना कमज़ोरी है।
पहली दो शक्लें जायज़ हैं, लेकिन तीसरी हराम है, जब तक कि कोई असली मजबूरी न हो।
ग़ज़वा-ए-उहुद और ह़ुनैन में कुछ सहाबा पीछे हटे, मगर अल्लाह ने बाद में उन्हें माफ़ कर दिया।
तफ़्सीर रूहुल बय़ान में आया है कि जिहाद से भागना इस्लाम के 70 बड़े गुनाहों में से एक है।
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