कुरान - 8:16 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
وَمَن يُوَلِّهِمۡ يَوۡمَئِذٖ دُبُرَهُۥٓ إِلَّا مُتَحَرِّفٗا لِّقِتَالٍ أَوۡ مُتَحَيِّزًا إِلَىٰ فِئَةٖ فَقَدۡ بَآءَ بِغَضَبٖ مِّنَ ٱللَّهِ وَمَأۡوَىٰهُ جَهَنَّمُۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ

Transliteration: (Wa mai yuwallihim yawma'izin duburahooo illaa mutaharrifal liqitaalin aw mutahaiyizan ilaa fi'atin faqad baaa'a bighadabim minal laahi wa ma'waahu Jahannamu wa bi'sal maseer)

और जिस दिन (जंग के मैदान में) कोई उनसे पीठ फेर ले, सिवाय इस हालत के कि वह जंग की चाल के तौर पर ऐसा करे या अपनी जमाअत से मिलने के लिए हटे, तो वह अल्लाह के ग़ज़ब [32] का शिकार होगा और उसका ठिकाना जहन्नम है, और वह बहुत ही बुरा ठिकाना है [33]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 16 की तफ़्सीर

✅ [32] जिहाद में पीठ फेरने का गुनाह

इस आयत में बयान है कि जंग के मैदान से बिना वजह भागना बड़ा गुनाह है और यह अल्लाह के ग़ज़ब को लाता है।
भले दुश्मन की तादाद ज़्यादा क्यों न हो, ईमान वालों पर डटे रहना फ़र्ज़ है।
मोमिन के लिए मौत भी शहादत है, इसलिए भागना कमज़ोरी है।

✅ [33] पीठ फेरने की तीन शक्लें

  1. जंगी चाल (रणनीति) – दुश्मन को धोखा देने या नई योजना बनाने के लिए पीछे हटना।
  2. अपनी जमाअत से मिलना – बिछड़ जाने के बाद अपनी फ़ौज में दोबारा शामिल होना।
  3. कायराना फ़रार – डरकर भाग जाना।

पहली दो शक्लें जायज़ हैं, लेकिन तीसरी हराम है, जब तक कि कोई असली मजबूरी न हो।
ग़ज़वा-ए-उहुद और ह़ुनैन में कुछ सहाबा पीछे हटे, मगर अल्लाह ने बाद में उन्हें माफ़ कर दिया।
तफ़्सीर रूहुल बय़ान में आया है कि जिहाद से भागना इस्लाम के 70 बड़े गुनाहों में से एक है।

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