कुरान - 8:17 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
فَلَمۡ تَقۡتُلُوهُمۡ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ قَتَلَهُمۡۚ وَمَا رَمَيۡتَ إِذۡ رَمَيۡتَ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ رَمَىٰ وَلِيُبۡلِيَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ مِنۡهُ بَلَآءً حَسَنًاۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٞ

Transliteration: (Falam taqtuloohum wa laakinnal laaha qatalahum; wa maa ramaita iz ramaita wa laakinnal laaha ramaa; wa liyubliyal mu'mineena minhu balaaa'an hasanaa; innal laaha Samee'un Aleem)

तो (ऐ ईमान वालो) तुमने उन्हें क़त्ल नहीं किया, बल्कि अल्लाह ने उन्हें क़त्ल किया [34]। और ऐ मेरे हबीब ﷺ, जो मिट्टी आपने फेंकी, वह दरअस्ल आपने नहीं फेंकी बल्कि अल्लाह ने फेंकी [35], ताकि वह ईमान वालों को अपनी तरफ़ से बेहतर इनाम अता करे [36]। बेशक अल्लाह सुनने वाला, जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 17 की तफ़्सीर

✅ [34] फ़तह का मालिक अल्लाह है

ग़ज़वा-ए-बद्र के बाद कुछ सहाबा ने बयान किया कि उन्होंने किस दुश्मन को मारा।
इस आयत ने याद दिलाया कि असल क़त्ल और जीत अल्लाह की मदद से हुई, न कि अपनी ताक़त से।
सीख यह है कि कामयाबी को अल्लाह से जोड़ना चाहिए, अपनी मेहनत से नहीं।

✅ [35] नबी ﷺ का अमल, अल्लाह की क़ुदरत से

जब नबी ﷺ ने बद्र में एक मुट्ठी मिट्टी फेंकी, तो वह दुश्मनों की आंखों में जा पहुंची और वे परेशान हो गए।
क़ुरआन बताता है कि यह अमल अल्लाह की तरफ़ से था, जिसने अपने हबीब ﷺ को इस करामत से मदद दी।
इससे साबित होता है कि अल्लाह अपने नबी के ज़रिये अमल करवाता है और मोमिनों को दिव्य ताइद (मदद) मिलती है।

✅ [36] ईमान वालों के लिए इनाम

अल्लाह ने इन घटनाओं को इसलिए पैदा किया ताकि ईमान वालों को बड़ा इनाम मिले।
यह इनाम दुनियावी फ़तह और माल-ए-ग़नीमत भी है और रूहानी अज्र भी।
क़ुरआन यह सिखाता है कि इनाम भी एक इम्तिहान है, जैसे मुश्किलात इम्तिहान होती हैं।

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