Transliteration: (Falam taqtuloohum wa laakinnal laaha qatalahum; wa maa ramaita iz ramaita wa laakinnal laaha ramaa; wa liyubliyal mu'mineena minhu balaaa'an hasanaa; innal laaha Samee'un Aleem)
ग़ज़वा-ए-बद्र के बाद कुछ सहाबा ने बयान किया कि उन्होंने किस दुश्मन को मारा।
इस आयत ने याद दिलाया कि असल क़त्ल और जीत अल्लाह की मदद से हुई, न कि अपनी ताक़त से।
सीख यह है कि कामयाबी को अल्लाह से जोड़ना चाहिए, अपनी मेहनत से नहीं।
जब नबी ﷺ ने बद्र में एक मुट्ठी मिट्टी फेंकी, तो वह दुश्मनों की आंखों में जा पहुंची और वे परेशान हो गए।
क़ुरआन बताता है कि यह अमल अल्लाह की तरफ़ से था, जिसने अपने हबीब ﷺ को इस करामत से मदद दी।
इससे साबित होता है कि अल्लाह अपने नबी के ज़रिये अमल करवाता है और मोमिनों को दिव्य ताइद (मदद) मिलती है।
अल्लाह ने इन घटनाओं को इसलिए पैदा किया ताकि ईमान वालों को बड़ा इनाम मिले।
यह इनाम दुनियावी फ़तह और माल-ए-ग़नीमत भी है और रूहानी अज्र भी।
क़ुरआन यह सिखाता है कि इनाम भी एक इम्तिहान है, जैसे मुश्किलात इम्तिहान होती हैं।
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