कुरान - 8:19 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
إِن تَسۡتَفۡتِحُواْ فَقَدۡ جَآءَكُمُ ٱلۡفَتۡحُۖ وَإِن تَنتَهُواْ فَهُوَ خَيۡرٞ لَّكُمۡۖ وَإِن تَعُودُواْ نَعُدۡ وَلَن تُغۡنِيَ عَنكُمۡ فِئَتُكُمۡ شَيۡـٔٗا وَلَوۡ كَثُرَتۡ وَأَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (In tastaftihoo faqad jaaa'akumul fathu wa in tantahoo fahuwa khairul lakum wa in ta'oodoo na'ud wa lan tughniya 'ankum fi'atukum shai'anw wa law kasurat wa annal laaha ma'al mu'mineen)

(ऐ काफ़िरों!) अगर तुम फ़ैसले [39] की दुआ मांग रहे थे, तो यह फ़ैसला तुम्हारे सामने आ चुका है। और अगर तुम बाज़ आ जाओ तो यह तुम्हारे लिए बेहतर [40] है। लेकिन अगर फिर वही शरारत दुहराओगे, तो हम भी तुम पर फिर अज़ाब देंगे। और तुम्हारी फ़ौज [41] चाहे कितनी ही ज़्यादा क्यों न हो, तुम्हारे किसी काम न आएगी। बेशक अल्लाह ईमान वालों के साथ है [42]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 19 की तफ़्सीर

✅ [39] तुम्हारी दुआ का जवाब

ग़ज़वा-ए-बद्र के वक्त काफ़िरों ने काबा पर दुआ की थी कि "जो सच्चा है उसे फ़तह मिले।"
यह आयत जवाब देती है कि सच्चाई का ग़लबा इस्लाम के हक़ में हुआ, और मुसलमान फ़तह याब हुए।

✅ [40] बाज़ आना ही बेहतर है

अगर काफ़िर दुश्मनी और कुफ़्र से बाज़ आ जाएं, तो यह उनके लिए ही भलाई है—
दुनियावी भी और आख़िरत की भी।
अल्लाह और उसके रसूल ﷺ को किसी की इताअत की ज़रूरत नहीं,
बल्कि फ़ायदा इंसान का अपना है।

✅ [41] ताक़त बेकार है

चाहे काफ़िरों की फ़ौज कितनी भी बड़ी क्यों न हो,
अल्लाह की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ कभी ग़ालिब नहीं हो सकती।
इसकी तस्दीक़ बाद के जंगों में भी हुई,
जहाँ कम तादाद वाले मुसलमानों ने बहुत बड़ी फ़ौजों को शिकस्त दी।

✅ [42] अल्लाह की मदद ईमान वालों के साथ है

अल्लाह का "साथ" होने का मतलब उसकी रहमत, नुसरत और बरकत है।
काफ़िरों पर उसका ग़ज़ब है, जबकि ईमान वालों पर उसकी मदद और फ़ज़ल।

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