कुरान - 8:20 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَطِيعُواْ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَلَا تَوَلَّوۡاْ عَنۡهُ وَأَنتُمۡ تَسۡمَعُونَ

Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo atee'ul laaha wa Rasoolahoo wa laa tawallaw 'anhu wa antum tasma'oon)

ऐ ईमान वालों! अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत करो [43], और जब तुम उनकी बातें सुन लो, तो उनसे मुँह न मोड़ो [44]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 20 की तफ़्सीर

✅ [43] अल्लाह और रसूल ﷺ की मुकम्मल इताअत

मुसलमानों पर अल्लाह के हुक्म मानना फ़र्ज़ है,
और रसूल ﷺ की इताअत भी उतनी ही लाज़िम है।
रसूल ﷺ के क़ौल, अमल और हुक्मों पर अमल करना दीन का हिस्सा है।
दूसरे आलिमों और रहनुमाओं की इताअत भी उसी वक़्त है,
जब वह क़ुरआन और सुन्नत के मुताबिक़ हो।

✅ [44] सुनकर मुँह मोड़ना गुनाह है

आयत में "उससे" का इशारा रसूल ﷺ की तरफ़ है।
मतलब यह कि रसूल ﷺ से मुँह मोड़ना दरअस्ल अल्लाह से मुँह मोड़ना है।
जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का हुक्म सुनने के बाद भी इंकार करे,
वह सीधे हिदायत से हट जाता है।

 

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