Transliteration: (Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo atee'ul laaha wa Rasoolahoo wa laa tawallaw 'anhu wa antum tasma'oon)
मुसलमानों पर अल्लाह के हुक्म मानना फ़र्ज़ है,
और रसूल ﷺ की इताअत भी उतनी ही लाज़िम है।
रसूल ﷺ के क़ौल, अमल और हुक्मों पर अमल करना दीन का हिस्सा है।
दूसरे आलिमों और रहनुमाओं की इताअत भी उसी वक़्त है,
जब वह क़ुरआन और सुन्नत के मुताबिक़ हो।
आयत में "उससे" का इशारा रसूल ﷺ की तरफ़ है।
मतलब यह कि रसूल ﷺ से मुँह मोड़ना दरअस्ल अल्लाह से मुँह मोड़ना है।
जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का हुक्म सुनने के बाद भी इंकार करे,
वह सीधे हिदायत से हट जाता है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat