Transliteration: (Zaalikum wa annal laaha moohinu kaidil kaafireen)
यह आयत ईमान वालों के लिए तसल्ली और खुशी का पैग़ाम है।
अल्लाह जैसे फरमा रहा हो कि:
“ऐ मेरे हबीब ﷺ के चाहने वालो! यह जीत और माल-ए-ग़नीमत तो अभी का इनाम है,
आगे भी तुम्हारे लिए दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त और बरकतें हैं।”
साथ ही यह भी बयान है कि काफ़िर चाहे जितनी चालें चलें,
अल्लाह हमेशा उनकी योजनाओं को नाकाम कर देता है।
ग़ज़वा-ए-बद्र में जो इज़्ज़त और मदद दी गई, वह तो बस इब्तिदा (शुरुआत) है,
आगे और भी फ़ज़ल और नुसरत ईमान वालों के लिए मुहैय्या होगी।
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